बीस हजार एन. जी. ओ. प्रतिबंधित करना सराहनीय कदम

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बीस हजार एन. जी. ओ. का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है क्योंकि इनको हजारों करोड़ रुपया विदेशी चंदे के रूप में मिलता था | यह चंदा जनसेवा के नाम पर आता है परंतु वास्तविक उद्देश्य देश द्रोह के क्रिया कलापों को बढ़ावा देना और चलाना है | अनेकों बुद्धिजीवियों, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े हुए लोगों को इस धन से लाभान्वित किया जाता है और उनको भारतीय संस्कृति, भारतीय महान परम्पराओं, धार्मिक आस्थाओं पर प्रहार करने, गलत व्याख्या करने तथा खिल्ली उड़ाने का काम दिया जाता है | धन के बल पर यह लोग इस तरह के कार्यों में लिप्त रहते हैं | इसके अलावा देश की अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति को कमजोर करने तथा जो भी सरकार रहे उसके प्रति जनमानस में विद्रोह की भावना पैदा करने, सामाजिक समरसता को ध्वस्त का भी काम दिया जाता है | धन के लालच में यह लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी जासूस व एजेंट के रूप में कार्य करते आ रहे हैं | धन भेजने का सबसे अच्छा साधन एन. जी. ओ. है, ठीक उसी तरह जैसे डाकू, चोर व ठगों के लिए साधू, पुलिस व नेता का चोला पहनकर अपना काम करना सरल हो जाता है |

उक्त एन. जी. ओ. सरकारी धन की भी बहुत लूट करते हैं | सरकारी योजनाओं के प्रचार – प्रसार व जनसेवा के लिए प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपया इन एन. जी. ओ. को भुगतान किया जाता है जिसमें से आधा रुपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, शेष में से आधा रुपया एन. जी. ओ. चलाने वाला उदरस्त कर जाता है और बचे हुए हुए चौथाई रुपया के द्वारा दिए गए कार्य औपचारिकता पूरी की जाती है | जो एन. जी. ओ. विदेशी धन से चलते हैं उनकी निगरानी अर्थात जांच पड़ताल हो गयी और कार्यवाही भी प्रारम्भ हो गयी, उसके लिए हमारे प्रधानमंत्री जी व उनके सहयोगी बधाई के पात्र हैं | परंतु देशी धन की लूटपाट करने वाले एन. जी. ओ. भी जाँच के दायरे में आएंगे और यह लूट पात बंद होगी यह अपेक्षा है |