मोदी विरोध की आड़ में हिन्दुओं का अपमान या हिन्दू विरोध के लिए मोदी विरोध का सहारा ?

सेक्युलर जमात हिन्दू धर्म एवं हिन्दुओं के अपमान का कोई भी मौका कभी नहीं छोड़ती | ऐसे ऐसे मुद्दे जिनका हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है उनमें भी हिन्दू धर्म को घेर लिया जाता है | इस सब पर मैं कई बार पहले भी लिख चुका हूँ अतः वही सब बातें फिर से यहाँ नहीं लिखूंगा | इस बार आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लाम्बा जी. एस. टी. के विरोध की आड़ में गौ माता को ले आयीं | जहाँ तक मुझे पता है महिलाओं के सेनिटरी पैड्स इस देश में कभी भी टैक्स फ्री नहीं थे | अलका लाम्बा काफी समय तक कांग्रेस की सदस्य रहीं और उस समय उन्होंने कभी भी सेनिटरी पैड्स पर लगने वाले टैक्स का विरोध नहीं किया परन्तु मोदी सरकार में उन्हें यह टैक्स महिलाओं पर अत्याचार लग रहा है | विरोध का कारण पूर्णतयः राजनैतिक है और इसका महिलाहित से कोई लेना देना नहीं है यह बात आप समझ ही गए होंगे |

खैर सेनेटरी पैड्स पर लगने वाला टैक्स यदि अलका लाम्बा को अचानक से गलत लगने भी लगा तो वह इसका विरोध करने के लिए पूर्णतयः स्वतंत्र हैं और हमारा संविधान उन्हें इसकी पूरी आजादी देता है | मुझे कोई अधिकार नहीं कि मैं उनकी इस स्वतंत्रता में कोई बाधा डालने की कोशिश करूँ | परन्तु मैं हिन्दू हूँ, गाय मेरे लिए भोजन या जानवर नहीं बल्कि गौ-माता हैं | उनका किसी भी गंदे राजनैतिक प्रयोजन में प्रयोग मेरी और मेरी तरह कई हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करता है | सेनिटरी पैड्स को लेकर अलका लाम्बा ने जो ट्वीट किया उसमें बिना वजह गौ-माता का जिक्र करना गौ-माता एवं समस्त हिन्दुओं का अपमान है | उस ट्वीट में उन्होंने पुरुष प्रधान समाज का भी जिक्र किया | झारखण्ड में एक योग गुरु मुस्लिम महिला के खिलाफ यह कहकर फतवे जारी कर दिए कि योग इस्लाम में हराम है, उसके घर का घेराव करके उस पर हमले की कोशिश की गयी परन्तु उस मुद्दे पर अलका लाम्बा को महिलाहित का ख्याल नहीं आया | केरल में एक के बाद एक कई महिलाओं ने लव जेहाद के केस रजिस्टर करवाए परन्तु वहां भी अलका लाम्बा को महिलाहित का ख्याल नहीं आया | वो ऐसी पार्टी से हैं जिसने निर्भया कांड के अपराधी को सिलाई मशीन आदि सरकारी सहायता प्रदान की थीं | उस समय भी अलका लाम्बा का महिलाहित और महिलाप्रेम नहीं जागा | ऐसे कई और मामले हैं जिनको अपनी तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से अलका लाम्बा ने कभी भी नहीं उठाया | हो सकता है कि यदि उनको बार बार पूछा जाए तो शायद कुछ बोल भी दें परन्तु शायद उसमें भी वो कहीं न कहीं गौ-माता और हिन्दुओं का ही जिक्र कर दें |

सेक्युलर जमात ने अपनी सारी हदें इस समय पार की हुईं हैं | उन्हें न तो हिन्दुओं की भावनाओं की कोई क़द्र है और न ही हिन्दू धर्म की | उम्मीद है कि हिन्दू इस सेक्युलर जमात के विरोध में एकता के साथ खड़े होंगे और उनको चुनावों में तगड़ी हार का सामना करवाएंगे |