ममता के राज में हिंदुओं की दुर्दशा की खबर दिखाना गुनाह है | यह प. बंगाल है या नया पाकिस्तान ?

प. बंगाल से आये दिन खबरें आती रहतीं हैं कि किस तरह वहां हिंदुओं पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं | वोट बैंक के लालच में प. बंगाल की सेक्युलर सरकार ने भी इन मामलों पर कोई कार्रवाही न करके इन अत्याचारियों को खुली छूट ही दे दी हैं | हिंदुओं के खिलाफ होने वाले ऐसे कई अत्याचार प. बंगाल में गैर-कानूनी तरीके से बसे हुए बांग्लादेशी मुसलमानों द्वारा किये गए हैं | बाहरी शक्तियों द्वारा किये जा रहे इन अत्याचारों के बारे में सुनकर कई बार विश्वाश ही नहीं होता कि प. बंगाल भारत का हिस्सा है या पाकिस्तान का | प. बंगाल सरकार तो सेकुलरिज्म में इतनी अंधी हो चुकी है कि हिन्दू त्योहारों के मनाये जाने पर भी कई तरह के अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है, दुर्गा पूजा में सरकार द्वारा दिया गया असंवैधानिक आदेश इस का ताजा उदाहरण है |

प. बंगाल में कुछ दिन पहले दंगे हुए जिनमे हिन्दुओं के घरों एवं मंदिरों पर देसी बमों से हमला किया गया | सेक्युलर जमात के नेताओं और मीडिया एजेंसियों ने तो हमेशा की तरह इस मामले पर अपने आँख, कान और मुँह बंद कर लिए क्योंकि हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार का विरोध करना इस जमात के उसूलों के खिलाफ है | जी न्यूज़ ने इस मुद्दे पर रिपोर्ट बनायी तथा देश की जनता को प. बंगाल में हो रही हिंदुओं की दुर्दशा के बारे में बताया | भाजपा ने भी इस मुद्दे पर प. बंगाल सरकार को घेरने की कोशिश की तथा दोषियों को सजा देने के लिए दवाब बनाने की कोशिश की | हालाँकि ममता बेनर्जी अपनी वोट बैंक की राजनीति के कारण कभी भी इन दंगाइयों पर कोई कार्यवाही नहीं करने वाली | लेकिन इस बार ममता बेनर्जी ने लोकतंत्र की हत्या करते हुए जी न्यूज़ के पत्रकारों पर ही गैर-जमानती धाराओं के तहत केस कर दिया | इस काम से एक तरफ तो ममता बेनर्जी ने दंगाइयों को संरक्षण दिया वहीँ दूसरी ओर सच को सामने लाने वाली रिपोर्ट को दबाने के लिए जी न्यूज के पत्रकारों पर दवाब डालने की कोशिश की |

प. बंगाल की वर्तमान राज्य सरकार हिंदुओं पर होने वाले इस अत्याचार को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है | न ही ऐसी कोई दिलचस्पी प, बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टियों यानि कि वामपंथियों एवं कांग्रेस में दिखाई देती है | भाजपा के अभी प. बंगाल में इतने विधायक नहीं हैं कि इनके विरोध का सरकार पर कोई असर पड़े |

यह एक बड़ा सत्य है कि प. बंगाल की वर्तमान सरकार स्पष्ट बहुमत होने की वजह से आराम के साथ अपना कार्यकाल पूरा करेगी | लोकल पुलिस यदि चाहे तो भी राज्य सरकार के मर्जी के बिना ऐसे मामलों में दोषियों पर कोई कार्रवाही नहीं कर सकती | फिर ऐसे में क्या कदम उठाये जा सकते हैं जिस से कि हिंदुओं पर होने वाले इस अत्याचार को रोक जा सके ? क्या अब प. बंगाल के ऐसे कुछ क्षेत्रों में शांति एवं कानून बनाये रखने के लिए सेना की सहायता लेना ही एक मात्र विकल्प बचा है ? क्या अब जम्मू कश्मीर एवं उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों की तरह प. बंगाल में भी ऐसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों में AFSPA लगाना ही एक तरीका रह गया है ?

मेरी व्यक्तिगत राय में तो ऐसे सभी मामलों पर अब गंभीरता के साथ विचार किया जाना आवश्यक है | यदि आवश्यकता लगे तो प. बगाल के ऐसे सभी क्षेत्रों में हालात सुधरने तक सेना को नियंत्रण दे दिया जाना चाहिए |