केजरीवाल जी पर जूते चप्पलों का हमला विरोधियों की चाल या आ. आ. पा. का चुनावी हथकंडा ?

हर बार चुनाव के पहले केजरीवाल जी पर जूते, चप्पल, थप्पड़ आदि चलने लगते हैं | फिर शुरू हो जाता है इस घटना का उपयोग जनता की सहानुभूति बटोरनें एवं भाजपा पर हमले करने में | हर बार इस तरह की घटनाओं को देखकर यही सोचता हूँ कि ये जूते, चप्पल, थप्पड़ आदि चलाने वाला व्यक्ति केजरीवाल जी का दुश्मन है या समर्थक क्योंकि इन घटनाओं का असर जनता की सहानुभूति के रूप में केजरीवाल जी के पक्ष में ही होता दिखता है |

अब भाजपा, कांग्रेस एवं अन्य पुरानी पार्टिया इतनी मूर्ख तो हैं नहीं जो कि बैठे बिठाये अपने खिलाफ केजरीवाल जी को एक ऐसा मुद्दा दे दें जिस से केजरीवाल जी को जनता की सहानुभूति मिले एवं इन पार्टियों कि छवि ख़राब हो |

बार बार एक ही फिल्म दिखाए जाने से अच्छी से अच्छी हिट फिल्म में भी लोगों की रुचि खत्म हो जाती है | ऐसा ही कुछ हाल अब केजरीवाल जी के साथ होने वाली इन घटनाओं का होने लगा है | अब जनता कितनी बार एक ही बात के लिए इनको सहानुभूति दिखाएगी और कितनी बार इनकी इस बात पर विश्वाश करेगी कि ये सब मोदी जी एवं भाजपा के इशारे पर हो रहा है |

खैर हमारे पास किसी के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं तो हम ये तो नहीं कह सकते कि ये सब घटनाएं किस के इशारे पर हो रहीं हैं | लेकिन मुझे लगता नहीं कि केजरीवाल जी की किसी भी विरोधी पार्टी में इतनी नासमझी है कि वो ऐसे बैठे बिठाये केजरीवाल जी को एक नया ऐसा मुद्दा देती रहे जिस से कि एक तरफ तो केजरीवाल जी को जनता की सहानुभूति मिले और दूसरी तरफ इन पार्टियों की छवि ख़राब हो |

पंजाब चुनावों में केजरीवाल जी को इन सब घटनाओं से फायदा होता है या नुकसान ये तो आने वाला समय ही बताएगा | अब जनता को तय करना है कि वो इन सब घटनाओं के लिए किस को जिम्मेदार मानती है |