ज्यादातर न्यूज़ एजेंसियां एवं नेता इन मुद्दों पर चुप क्यों है ?

पिछले कुछ दिनों से कई न्यूज़ चैनल लगातार फिल्मस्टार विपाशा बासु की शादी के बारे में न्यूज़ दिखा रहे हैं | कन्हैया कुमार कब कहाँ जाता है, क्या बोलता है, क्या करता है, किस से मिलता है, ये सब भी खूब दिखाया जा रहा है | केजरीवाल जी ने किस नए मुद्दे पर मोदी जी को घेरा ये भी न्यूज़ में बहुत आता है | किस टी वी शो में क्या चल रहा है है ये भी रोज ही दिखाया जाता है | लेकिन पिछले कुछ महीनों में समाज और कानून को शर्मिंदा करने वाले ऐसे कई कांड हुए जिनको ज्यादातर न्यूज़ एजेंसियों ने नहीं दिखाया | पहले ऐसे कुछ प्रमुख मुद्दों की बात करता हूँ |

१) ये नया मामला है केरल में एक लड़की के साथ बलात्कार के बाद उस की क्रूर हत्या का | ये कांड दिल्ली के निर्भया कांड जैसा ही है क्योंकि यहाँ भी हत्यारों ने लड़की को मारते समय क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दीं | मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश वाले मामले को महिलाओं के शसक्तिकरण से जोड़कर दिन रात चिल्लाने वाले पत्रकार, नेता अब केरल की इस मासूम लड़की के साथ हुई इस शर्मनाक घटना पर चुप हैं | शायद इन लोगों की नजर में इस मामले का महिला शसक्तिकरण से कोई सम्बन्ध नहीं है | शायद इनकी सोच के हिसाब से महिलाओं के साथ बलात्कार होना छोटी बात है लेकिन महिलाओं को मंदिरों में प्रवेश न मिलना बहुत बड़ा मुद्दा है | यदि आपको नहीं पता हो तो मैं बता दूँ कि केरल में ये घटना २८ अप्रैल को हुई थी | इस मासूम लड़की के शरीर पर ३० से ज्यादा घाव थे | क्या आपको पता चला इस बारे में ? ज्यादातर नेता एवं पत्रकार इतने दिनों से इस मामले को छुपाए हुए हैं और चुप हैं |

२) अगस्ता डील जो कि अभी इतना बड़ा मुद्दा बना हुआ है, उस पर भी ज्यादातर न्यूज़ एजेंसियां, पत्रकार, नेता महज औपचारिकता के लिए थोड़ा बहुत बोलकर चुप ही हैं | कुछ लोगों को तो ऐसे समय में अगस्ता डील पर बोलने से ज्यादा मोदी जी की शिक्षा एवं जन्मतिथि जानने में रूचि है |

३) बिहार में भाजपा नेताओं की हत्या और केरल एवं पश्चिम बंगाल में स्वयंसेवकों एवं भाजपा नेताओं की हत्या पर भी ज्यादातर न्यूज़ एजेंसियां एवं पत्रकार चुप हैं | शायद इनकी नजर में भाजपा नेताओं एवं संघ के सदस्यों की हत्या करना अपराध ही नहीं है |

४) दिल्ली में डॉ. नारंग की मामूली बात पर क्रूर हत्या कर दी गयी थी लेकिन इस मुद्दे को भी ज्यादातर न्यूज़ एजेंसियों ने एक छोटे से मुद्दे की तरह दिखाया और दिल्ली के मुख्य्मंत्री केजरीवाल जी ने भी ऐसे ही हल्के तरीके से एक बार इस मुद्दे पर बोल तो दिया लेकिन आगे कुछ शोर नहीं मचाया |

५) बिहार में बदमाशों ने गरीब दलितों परिवारों के १२५ घर जला दिए | इन गरीब बेघर हुए लोगों पर न तो नितीश जी, लालू जी, हर मुद्दे पर बोलने वाले केजरीवाल जी ने कुछ बोलना उचित समझा और न ही ज्यादातर न्यूज़ चैनल, पेपर आदि ने | शायद इन नेताओं एवं ज्यादातर न्यूज़ एजेंसियों के लिए इस समय बिहार में केवल एक ही दलित एवं गरीब व्यक्ति है और वो है कन्हैया कुमार |

६) मालदा (पश्चिम बंगाल) एवं पुरनिया (बिहार) में हुए दंगों पर भी ऐसे नेता एवं पत्रकार चुप रहे |

अब इन सब बातों पर मीडिया एवं नेताओं की चुप्पी का क्या केवल एक यही कारण है कि इन सब मामलों में न तो भाजपा एवं मोदी जी पर किसी तरह का कोई हमला करने का मौका है, न ही हिन्दू आतंकवाद या असहिष्णुता का कोई केस बनता है और न ही इन मुद्दों को बड़ा बनाने के लिए कहीं से किसी तरह की कोई फंडिंग आने वाली है ?

मैं ये फैसला इस देश की जनता पर ही छोड़ता हूँ क्योंकि ऐसे मौकापरस्त न्यूज़ चैनलों को देखकर उनकी टी आर पी जनता ही बढ़ाती है और ऐसे मौकापरस्त नेताओं को वोट देकर मजबूत भी इस देश की जनता ही बनाती है | पहले ये लोग आप से ही शक्ति प्राप्त करते हैं और फिर उस शक्ति का आप के ही खिलाफ उपयोग करते हैं | जब तक जनता ये सच नहीं स्वीकार करेगी और सुधरेगी नहीं तब तक इस देश के हालात शायद ऐसे ही रहने वाले हैं |