अमेरिका, चीन एवं यूरोप में आतंकी हमले का डर – मियां की जूती मियां के सर

कुछ सालों पहले तक जब भारत आतंकवाद का मुद्दा उठता था तो यही अमेरिका, चीन और यूरोपी देश विश्व में आतंकवाद के होने को ही मानने से इंकार कर देते थे | इस का मुख्य कारण कहीं न कहीं ढके छुपे तरीके से इन देशों का भारत एवं अन्य कुछ देशों के खिलाफ आतंकवाद को हथियार की तरह प्रयोग करना था | इसी कारण अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देश एवं चीन द्वारा पाकिस्तान को अत्यधिक आर्थिक सहायता दी जाती है जिसका उपयोग विकास में न होकर आतंकवादी पैदा करने और उनको प्रशिक्षित करने में होता है | आज आतंकवाद की इसी फैक्ट्री से सारी दुनिया में आतंकवादी फ़ैल कर अड्डे बना रहे हैं | अब आतंकवाद का सहारा एवं जन्मदाता इस आतंकवाद के खिलाफ उठने वाली आवाजों का समर्थन क्यों करता ? ये देश अब तक चुप थे क्योंकि “जाके पैर न फटे बिवायी वो क्या जाने पीर परायी” |

दुनिया पर राज़ करने की चाहत में इन देशों ने आस्तीन के सांप रुपी ये आतंकवादी संगठन पाल तो लिए लेकिन अब वो सांप ताकतवर होकर इन्ही को डस रहे हैं | आज जब इन्ही के पैदा किये आतंकी संगठनों अपने जन्मदाता इन देशो पर भी हमले का मौका नहीं छोड़ रहे हैं तो इन आतंकवाद के जन्मदाताओं को अचानक से दुनिया में आतंकवाद के होने का अहसास होने लगा है | इसीलिए अचानक से एक एक कर के इन देशों के मुँह से आतंकवाद के खिलाफ बातें निकल रहीं हैं और अब ये आतंकवाद के जन्मदाता एक एक कर के अपनी आतंकवादी संतानो को मारने के लिए निकल पड़े हैं और दुनिया से आतंकवाद के खिलाफ एक जुट होने को कह रहे हैं |

कहाँ थे ये देश जब भारत अपने खिलाफ हो रहे आतंकी हमलों का मुद्दा उठाता था ? उस समय इन देशों ने भारत का साथ क्यों नहीं दिया ? सिर्फ दुनिया पर राज़ करने के लिए आये दिन किसी न किसी नए आतंकी संगठन को जन्म देने वाले ये देश आज अपनी ही आतंकी सन्तानों से इतना क्यों डर रहे हैं ? किसी भी देश में मासूम लोगों की जानें जाने की ख़ुशी मनाना भारतीय संस्कार नहीं हैं इसलिए हमें इन देशों में भी हो रहे आतंकी हमलों में गयीं जानों का दुःख है |

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक बार अपनी कविता के जरिये पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि – “चिंगारी का खेल बुरा होता है, औरों के घर में आग लगाने का जो सपना वह अपने घर में ही सदा खरा होता है” | आज अटल जी की कही ये बात सारी दुनिया में आतंक को बढ़ावा देने वाले हर एक देश को समझनी जरुरी है कि अब तक जिस चिंगारी को वो दूसरे देशों की तरक्की में बाधा डालने के लिए इस्तमाल कर रहे थे अब वो उनके घर तक पहुँच चुकी है और यदि इन देशों ने आतंक का ये व्यापार बंद नहीं किया तो अब इन देशों में भी आये दिन ऐसे आतंकी हमले होते रहेंगे और मासूम लोगों की जानें जातीं रहेंगी |

अटल जी कि ये पूरी कविता इस लिंक पर सुनें –