तीन बार तलाक कहकर नारी के सम्मान, स्वाभिमान एवं भविष्य की हत्या बंद होनी चाहिए

ट्रिपल तलाक इस समय काफी गर्म मुद्दा हो चुका है | कुछ मुस्लिम महिला संगठन तीन बार तलाक के नाम पर महिलाओं पर होने वाले इस अत्याचार का विरोध कर रहे हैं, मामला कोर्ट तक पहुँच गया है | मुस्लिम लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक के समर्थन में अजीबोगरीब तर्क देते हुए कोर्ट को कहा कि ट्रिपल तलाक मुस्लिम पुरुषों को अपनी पत्नियों की हत्या करने से रोकता है | हद है | इस्लाम के तथाकथित जानकारों द्वारा धर्म के नाम पर कुरूतियों के बचाव में ऐसा कुतर्क क्यों ?

सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक के लिए इस देश में मुस्लिम पुरुषों को कुछ ऐसे अधिकार दिए गए हैं जिनका उपयोग करके वो आये दिन मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार करते हैं | कितना आसान है इस कानून में एक महिला के सम्मान, स्वाभिमान एवं भविष्य की हत्या कर देना | सिर्फ तीन बार तलाक बोलो और हो गयी महिला के सम्मान, स्वाभिमान एवं भविष्य की हत्या तथा साथ ही पुरुष को एक और महिला की ज़िन्दगी बर्बाद करने का हक़ मिला सो वो अलग | हद तो यह है कि तीन बार तलाक मुँह से बोलने की जगह यदि एस एम एस, व्हाट्सएप्प मैसेज, फेसबुक मैसेज, चिट्ठी, ई-मेल आदि किसी भी सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से भी कह दिया जाये तो भी यह तलाक वैध माना जाता है |

न्यायालय भी इस मुद्दे पर फूंक फूंक के कदम रख रहा है | न्यायलय ने इस विषय में सरकार की राय पूछी है | यहाँ मुझे यह नहीं समझ आ रहा कि न्यायलय में बैठे बुद्धिमान जजों को आखिर संदेह किस बात पर है ? कोई भी व्यक्ति इस ट्रिपल तलाक के कानून के बारे में जानकार बता देगा कि यह सीधे सीधे महिलाओं के खिलाफ एक साज़िश है | यह कानून मुस्लिम पुरुषों को महिलाओं पर अत्याचार करने की खुली छूट है | कोई भी अत्याचार करते रहो और जहाँ महिला ने विरोध किया तो तलाक देने की धमकी दे डालो | मुस्लिम पुरुषों को अपनी पत्नियों को तलाक देना अन्य धर्मों के पुरुषो जैसा कठिन काम नहीं है | अन्य धर्मों के पुरुष यदि तलाक के जरिये किसी तरह का अत्याचार करने की कोशिश करें तो महिलाओं को न्यायलय से उचित मदद एवं न्याय मिल सकता है लेकिन मुस्लिम महिलाओं को यह सुविधा नहीं है क्योंकि उनको तलाक देना बहुत ही आसान है | सिर्फ तीन बार तलाक ही तो बोलना है |

अब इस मुद्दे पर वोटबैंक की राजनीति भी बहुत होगी | तथाकथित सेक्युलर नेता एवं पार्टियां इस कानून को मुसलमानों का आतंरिक मामला बताकर इस के बचाव में खड़े हो जायेंगे | कई तथाकथित धर्म प्रचारक अपने कुतर्कों के जरिये इस का बचाव करेंगे | हो सकता है कि मुसलमानों का प्रगतिवादी वर्ग इस मामले में मुस्लिम महिला संगठनों का साथ देते हुए ट्रिपल तलाक का विरोध करे लेकिन उनकी आवाज और राय को कई मीडिया एजेंसियां कभी नहीं दिखाएंगी | यदि केंद्र सरकार इस मामले में इन मुस्लिम महिला संगठनों का साथ देते हुए ट्रिपल तलाक का विरोध करती है तो कई मीडिया एजेंसियों एवं विपक्षी पार्टियों को फिर से देश में असहिष्णुता दिखाई देने लगेगी और मोदी जी एवं भाजपा को मुसलमान विरोधी के रूप में चित्रित कर दिया जायेगा | न्यायालय एवं केंद्र सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक के कानून में किसी भी हस्तक्षेप को तुरंत मुसलमानों / अल्पसंख्यकों पर अत्याचार साबित कर दिया जायेगा |

मेरी व्यक्तिगत राय में महिलाओं के साथ होने वाले सभी तरह के अत्याचारों के खिलाफ कड़े कानून बनने चाहिए और साथ ही ऐसे कानून जिनका कि महिलाओं पर अत्याचार करने के लिए ढाल की तरह उपयोग किया जाता है, उन पर पुनर्विचार करके उनमे आवश्यक सुधार किये जाने चाहिए | न्यायालय को इस मामले में जल्दी से जल्दी फैसला सुनाना चाहिए और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए | मुस्लिम महिलाओं को भी सम्मान से जीने के उतने ही संवैधानिक एवं कानूनी हक़ होने चाहिए जितने कि अन्य धर्मों की महिलाओं को मिलते है | धर्म के नाम पर मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले इस अत्याचार को तुरंत बंद किया जाना चाहिए | यहाँ बात धर्म की नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान एवं भविष्य की है | ट्रिपल तलाक के कानून के हट जाने से इस्लाम पर कोई खतरा नहीं आ जायेगा बल्कि इस से मुस्लिम महिलाओं को भी वो अधिकार मिल सकेंगे जो कि अन्य धर्मों की महिलाओं को मिलते हैं |

(फोटो साभार – DNA)