शहीद दिवस पर विशेष – कब करेगा ये देश शहीदों के साथ न्याय ?

इस देश के शहीद न तो हिन्दू थे, न मुस्लिम थे, न सिख थे, न ईसाई थे, न अगड़े थे, न पिछड़े थे, न दलित थे न ही अन्य किसी जाति या धर्म के थे | उनकी एक ही पहचान थी उनका “भारतीय” होना | उनका एक ही परिवार था – “भारत” | उनका एक ही उद्देश्य था – “भारत माता की आज़ादी/रक्षा” | उनका एक ही सपना था – “भारत माता का सम्मान पूरा विश्व करे” | वो भारत माता की सच्ची संतानें अपने इस पहचान, परिवार, उद्देश्य एवं सपने के लिए शहीद हो गए लेकिन हमने क्या किया ? आज हमारे बीच ऐसे कितने लोग हैं जो अपने दिल पर हाथ रखकर ये बोल सकते हैं की उन्होंने एक भी ऐसा काम सच्चे दिल के साथ किया जिस से की इन शहीदों की कुर्बानी व्यर्थ साबित न हो ?

आज सबसे बड़ी शर्म इस बात की है कि इस देश में “भारत माता की जय”, “वन्दे मातरम” का नारा लगाने का विरोध हो रहा है और ये विरोध करने वालों का समर्थन तथा “भारत तेरे टुकड़े होंगे”, “भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी” आदि नारे लगाने वाले आज़ाद घूम रहे हैं एवं उनको कई नेताओं, मीडिया एवं आम जनता में से कई लोगों का पूरा समर्थन मिल रहा है | किसी देश के लिए इस से बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है |

यदि आप अब अपनी पारिवारिक परिस्थितियों या उम्र का हवाला देकर ये बोलना चाहते हैं कि हम क्या करें तो आप इस देश के लिए शहीद हुए भारत माता की सच्ची संतानो में से कइयों की उम्र एवं तत्कालीन पारिवारिक परिस्थिति का अध्ययन करें | शहीद महारानी लक्ष्मीबाई, शहीद खुदीराम बोस, शहीद भगत सिंह आदि ऐसी कई शहीदों के बारे में पढ़िए कि वो किस उम्र में शहीद हुए थे | जिस उम्र में आज हमारे युवा इस देश का भविष्य छोड़िये स्वयं के ही भविष्य के लिए गंभीर नहीं होते उस उम्र में ये महान आत्माएं इस देश के लिए शहीद हो गयीं थीं | कई शहीद अपने पीछे अपना गरीब परिवार, बूढ़े माता-पिता आदि छोड़ के चले गए |

मैं मानता हूँ कि आज भारत के वो हालात नहीं हैं कि हर एक भारतीय हथियार हाथ में उठा के घर से निकल पड़े | लेकिन आज भी एक क्रांति की आवश्यकता है | अलग तरह की क्रांति, अपनी सोच बदलने की क्रांति | सबसे पहले अपनी सोच बदलें तभी देश बदलेगा |

सबसे पहले ये गलत सोच के कुछ उदाहरण देखिये और विचार कीजिये | आज देशवासियों की ये गलत सोच देश को आगे बढ़ने से रोक रही है –

१) समाज में जातिवाद का विरोध परन्तु वोट सिर्फ अपनी जाति के नेता को |
२) राजनीति में परिवारवाद का विरोध परन्तु हर बड़े नेता के बच्चों को उनकी योग्यता पर विचार किये बिना चुनाव में वोट दे देना | (व्यक्ति की योग्यता के आधार पर वोट डालें न कि उस के माता-पिता के बड़े नेता होने के कारण |)
३) अपने बच्चो से ये उम्मीद कि वो किसी ऐसी अच्छी सरकारी नौकरी में लग जाये जहाँ ऊपरी आमदनी अच्छी हो और साथ ही देश में बड़ रहे भ्रष्टाचार का विरोध करना |
४) अपना बच्चा बड़ा सरकारी अधिकारी बन जाये और पड़ोसी का बेटा सेना में भर्ती होकर देश के लिए शहीद हो जाये |
५) बेटी की शादी के समय दहेज़ का विरोध परन्तु बेटे के लिए मुँह खोल के दहेज़ मांगना |
६) जब अपना बेटा किसी लड़की के साथ दुर्व्यवहार करे तो वो लड़की के अत्यधिक आधुनिक होने की गलती परन्तु जब कोई आपकी बेटी को परेशान करे तो वो लड़कों की गलत मानसिकता |
७) बाल श्रम का विरोध करना परन्तु बाल श्रम के असली कारण यानि कि गरीब परिवार की मजबूरी को खत्म करने की दिशा में खुद कोई कदम न उठाना, बस सरकार को जिम्मेदार बताना | (यदि २-३ मध्यम वर्गीय परिवार मिलकर किसी एक गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ले लें तो उस गरीब की अगली पीड़ी गरीब नहीं रहेगी)
८) नेताओं के भ्र्ष्टाचार, गुंडागर्दी एवं कामचोरी का विरोध परन्तु हर बार उन्ही को कभी जाति, कभी धर्म तो कभी पैसों के लिए बेचकर अपना वोट देना |

लिखने को ऐसे कई उदाहरण हैं | बस यही कहना चाहता हूँ कि देश की सबसे बड़ी समस्या हर बदलाव की उम्मीद किसी दूसरे से करना है | पहले अपनी इस सोच को बदलें तभी देश बदलेगा | इसने क्या किया या उसने क्या किया के साथ साथ ये भी सोचें कि देश के बदलाव के लिए आपने क्या किया | देश में सारे बदलाव आपके पड़ोसी या आपके नेता नहीं कर देंगे, कुछ आपकी भी जिम्मेदारी हैं | सिर्फ यही सोच का बदलाव आपका इस देश के बदलाव में बहुत बड़ा योगदान होगा |

यदि इस देश के सभी शहीद भी यही सोच लेते कि हमारा पड़ोसी ही सारी क्रांति कर ले और हम घर पर बैठ कर बस चाय पीते हुए इस देश की ख़राब स्थिति पर चर्चा करें तो ये देश अंग्रेजों से आज़ाद कैसे होता और आज़ादी के बाद से अब तक सुरक्षित कैसे रहता ?