सामाजिक एकता ही है देशद्रोहियों को मुहतोड़ जवाब

वैसे तो देशद्रोही ताकतों के पास इस देश को सीख देने के लिए कुछ भी नहीं है लेकिन एक बात है जो कि इन देशद्रोहियों से सीखनी चाहिए | ये हमेशा संगठित रहते हैं तथा एक आवाज में देशद्रोह करते हैं | मुद्दा चाहे कोई भी हो ये लोग एक आवाज में जाग जाते हैं तथा देशद्रोही काम शुरू कर देते हैं | चाहे ऐसे देशद्रोही नेता हों या पत्रकार या आतंकवादी ये सभी मिलकर एक सोची समझी चाल के तहत संगठित होकर देशद्रोही काम को अंजाम देने की कोशिश करते हैं |

वहीँ दूसरी ओर देशभक्त लोग देश का मामला आने पर तो एक हो जाते हैं लेकिन बाकी समय कभी जाति तो कभी धर्म के नाम पर बंटे हुए रहते हैं | वैसे जाति एवं धर्म के नाम पर अलगाव का यह जहर भी इन देशद्रोही ताकतों का फैलाया हुआ है | मैंने अपनी फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में कई ऐसे लोगों को देखा है जो कि देश की सुरक्षा से सम्बंधित मामलों में तो एक हो जाते हैं लेकिन बाकी समय जाति एवं धर्म के नाम पर आपस में लड़ते रहते हैं |

मैं अपने सभी देशभक्त साथियों से कहना चाहता हूँ कि देशद्रोही अलगाववादी एवं उनके हमदर्द  नेता एवं पत्रकार इस समय संगठित होकर इस देश को खोखला करने की कोशिश कर रहे हैं | मुझे ऐसे लोगों के नाम लेने की आवश्यकता नहीं  है क्योंकि आप सभी ऐसे लोगों के नाम भली भांति जानते हैं | यह समय है कि सभी देशभक्त ताकतें एक हो जायें और ऐसी देशद्रोही ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दें |

इस देश में रहने वाला चाहे किसी भी धर्म या जाति का हो, वो पहले भारतीय है | लेकिन कथित धर्मनिरपेक्ष नेता और धर्म के ठेकेदार लोग उनको धर्म और जाति के नाम पर तोड़कर रखना चाहते हैं | अगर सभी देशवासी एक हो गए तो फिर इनकी राजनीति कैसे चलेगी ?

इशरत जहाँ को मासूम मुस्लिम लड़की बोलने वाले कथित धर्मनिरपेक्ष नेता एक तरफ तो कहते हैं कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता और वहीँ दूसरी तरफ हर आतंकी की फांसी का विरोध करते हैं उसे मुस्लिमों पर होने वाला अत्याचार कह कर | इन्ही कथित धर्मनिरपेक्ष लोगों को इस देश में भगवा आतंकवाद दिखाई देता है, देश में असहिष्णुता दिखाई देती है | इस देश के सभी लोगों को ऐसे सभी कथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं का विरोध करना चाहिए और आपस में एकता बनाकर रखना चाहिए |

जे इन यू में जो हुआ उस के बाद तो अब हम ये भी नहीं कह सकते कि इस देश में इस बिखराव का कारण अशिक्षा है | जे इन यू में पड़ने वाले ये देशद्रोही छात्र अशिक्षित तो नहीं हैं | हाँ, लेकिन राजनीति में बड़े पदों के लालची जरूर हैं | इनको कोई फर्क नहीं पड़ता कि इनके कारनामों से इस देश को कितना शर्मशार होना पड़ रहा है, लोगों के बीच नफरत की खाई बन रही है | बस इनको अपनी राजनीति चमकानी है, भले ही वो देशद्रोह के रास्ते पर चलकर ही क्यों न चमके |

बड़ा सवाल यह है कि आखिर इनके दिमाग में ये बात आई कैसे कि देश विरोधी काम करके, लोगों को धर्म के नाम पर तोड़ने की बात करके भी राजनीति चमकाई जा सकती है ? इन्होने कोई नया प्रयोग नहीं किया है | जो देख रहे हैं वही करने की कोशिश कर रहे हैं | कई नेताओं की राजनीति देशद्रोह के इन्ही रास्तों पर चल कर चमकी है | वही ये लोग करना चाह रहे हैं |

आखिर इसे कैसे रोक जा सकता है ? क्या सिर्फ कानून के इनको सजा दे देने से ये सिलसिला रुक जायेगा ? नहीं, अगर आप ये सिलसिला रोकना चाहते हैं, अपने बच्चों को देशद्रोह के रास्ते पर चलने से रोकना चाहते हैं, इस देश से देशद्रोहियों की जड़ें उखाड़ कर फेकना चाहते हैं और इस तरह के देश द्रोहियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाही करवाना चाहते हैं तो सब से पहले ऐसे सभी नेताओं, धर्म/जाति के ठेकेदारों को महत्व देना बंद करना होगा | इनकी बात सुनो ही नहीं, इनको वोट मत दो, इनके बहकावे में आकर कोई गलत रास्ता मत चुनो | ऐसे सभी देशद्रोही लोगों की ताकत इनको जनता के द्वारा वोट के रूप में मिलने वाला समर्थन है | एक बार ये वोट मिलना बंद हो गए, ऐसे सभी लोग अलग थलग पड़ जायेंगे और कानून भी बिना किसी दवाब के अपना काम कर पायेगा |

इतिहास गवाह है | जिन देशों में जनता देश हित को सबसे आगे रखती है वो सारे देश मजबूत हैं और जहां जहाँ जनता आपस में ही लड़ रही हैं वहाँ आये दिन विनाश, गुलामी और दंगों का तांडव चल रहा है | अगर आप इस देश को मजबूत रखना चाहते हैं तो एक हो कर रहिये और हर उस इंसान का विरोध करिये जो इस देश की एकता और अखंडता को चोट पहुँचाना चाहता है |