श्री राम को न मानने वालों में जागा नया भक्तिभाव – सब से बड़ा चुनावी धर्म परिवर्तन

राम सेतु पर हो रही कानूनी एवं राजनैतिक बहस के बीच किस तरह तत्कालीन कांग्रेस सरकार एवं इस के नेताओं द्वारा भगवान श्री राम को काल्पनिक पात्र कहा गया था यह आप सभी को याद ही होगा | किस तरह सेकुलरिज्म के नाम पर सभी तथाकथित सेक्युलर राजनैतिक दल एवं नेता अयोध्या में श्री राम मंदिर के खिलाफ रहे हैं यह भी आप जानते ही हैं | किस तरह राम जन्मभूमि आंदोलन के समय कुछ दलों ने कार सेवकों को रोककर और कुछ ने उन पर गोलियाँ तक चलवाकर खुद के सेक्युलर होने का प्रमाण दिया था | श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद तो इस देश की राजनैतिक स्थिति ऐसी हो गयी कि यदि कोई नेता गलती से भी प्रभु श्री राम का नाम ले ले तो उसे तुरंत सांप्रदायिक कह दिया जाता था और जो नेता हिन्दू आराध्यों एवं खास तौर से भगवान राम के अस्तित्व को माननें से ही इंकार कर दे और हिन्दू धर्म से दूरी बना के रखे तो उसे सेक्युलर होने का खिताब दिया जाता था | धीरे धीरे सेकुलरिज्म के नाम पर चल रहे इस मुस्लिम तुष्टिकरण के राजनैतिक खेल ने इतना गन्दा रूप ले लिया कि बात सिर्फ हिन्दुओं, हिन्दुओं के आराध्यों, हिन्दू त्योहारों, हिन्दू रीति-रिवाजों से दूरी बनाने की नहीं रह गयी बल्कि कभी हमारे आराध्यों को काल्पनिक कहा जाने लगा, कभी हमारे धर्म को अन्धविश्वाश कहा जाने लगा, कभी हमारे इतिहास से फिल्मों के जरिये छेड़छाड़ कर के हमारे आराध्यों एवं इतिहास के हमारे महान नायकों एवं नायिकाओं का अपमान किया जाने लगा, बड़े बड़े लेख लिखे जाने लगे कि क्यों हिन्दू त्यौहार नहीं मनाये जाने चाहिए, कई राज्यों में हमारे त्योहारों पर तरह तरह के अंकुश और प्रतिबन्ध लगाए जाने लगे, मंदिरों को घंटे और भजन बजाने से रोक दिया गया, यहाँ तक कि हमें सारी दुनिया में आतंकवादी भी कहा गया और इतने से ही मन नहीं भरा तो आये दिन दंगों में हमें मारा जाने लगा और एक के बाद एक कई कश्मीर बनाने के षड़यंत्र शुरू हो गए | जब भी हिन्दुओं ने इस सब के खिलाफ आवाज उठायी तो उल्टा हमें ही सांप्रदायिक कहकर प्रताड़ित किया गया, इस सब में तथाकथित सेक्युलर सरकारें और उनका सरकारी तंत्र खुलकर शामिल रहा, उन्हें ऐसा करते समय किसी तरह का कोई डर या शर्म नहीं थी | दंगों में मरे कोई भी लेकिन संरक्षण, सहायता और सहानुभूति सिर्फ मुसलमानों को ही मिलती थी और सरकारी और राजनैतिक पर्यटन भी उन्हीं के क्षेत्रों में ही किया जाता था |

हिन्दू संख्याबल में आज भी बहुमत में है परन्तु अब तक अपने धार्मिक उदारवाद और सहिष्णुता की वजह से बहुमत में होने के बावजूद अपना ऐसा घोर अपमान बर्दाश्त कर रहा था | शेर अगर अपना शौर्य छोड़कर शाकाहारी संत बन जाये तो बच्चे भी उसे पत्थर मारने से न डरें, वही हिन्दुओं के साथ हो रहा था | लेकिन जैसा कहते हैं कि एक दिन पाप का घड़ा जरूर भरता है | सेक्युलर जमात का भी भर के फूट गया और ऐसा फूटा कि छोटे छोटे राज्यों तक में सरकार बनाने के लिए तरस गए | हिन्दू बहुमत में एक होकर इनके खिलाफ होता गया | हिन्दू वोटबैंक भी हो सकता है यह बात सामने आयी और यह राजनैतिक सत्य भी कि जिसका हिन्दू वोटबैंक बन जाये उसको कोई भी दूसरा वोटबैंक चुनाव नहीं हरा सकता |

सेक्युलर जमात ने पहले तो इस नए हिन्दू वोटबैंक को तोड़ने के लिए कभी आरक्षण, कभी जातीय हिंसा तो कभी हिन्दुओं को आपस में लड़वाने वाले किसी दूसरे राजनैतिक टोटके का सहारा लिया | तरह तरह के नए नए जातीय नेता कुकुरमुत्ते की तरह पैदा होने लगे और उनके तथाकथित आन्दोलनों को सेक्युलर पार्टियों का समर्थन भी मिलता गया | हालाँकि यहाँ गलतियां भाजपा की तरफ से भी कम नहीं हुईं, ये सेक्युलर जमात के जाल में फंस गए और खुद ही ऐसे कुछ काम कर गए जिनसे हिन्दू वोटबैंक वापस जातियों में बिखर जाये, इनके राजनैतिक सलाहकारों को इतनी सी बात भी नहीं समझ आ रही कि २७२ सीट का आंकड़ा हिन्दू वोटबैंक से ही आएगा न कि कुछ गिनी-चुनी जाति विशेष के वोट से | अब इतने सेक्युलर नेताओं को चुनावी मास्टरस्ट्रोक के नाम पर भाजपा में भरते जायेंगे तो इस तरह की गलतियां होनी ही थीं | भाजपा की ऐसी नयी ताजा गलती एस.सी.-एस.टी. एक्ट के मामले मैं हुई और उस गलती ने सवर्णों एवं पिछड़ों के एक बड़े प्रतिशत को भाजपा के खिलाफ ला के खड़ा कर दिया, हिन्दुओं में आपस में जो मनमुटाव हुआ सो वो अलग | सेक्युलर जमात ने इस स्थिति का भी खूब लाभ उठाने का प्रयास किया है |

पिछले कुछ चुनावों से सेक्युलर पार्टियों को यह बात भी समझ आ गयी है कि उनकी हिन्दुओं को तोड़ने की रणनीति भी उनको वो चुनावी फायदा नहीं दे पा रही जो कि उनको चाहिए है | तो अब सबका टेम्पल रन शुरू हो गया | एक के बाद एक सेक्युलर नेता जो कि कभी हिन्दू धर्म के आराध्यों का नाम लेने से भी डरते थे, आजकल कभी हिन्दू मंदिरों के चक्कर लगाते पाए जाते हैं, कभी हिन्दू त्यौहार मनाते नजर आते हैं, कभी त्योहारों के कार्यक्रम में सरकारी सहायता पहुंचाने की बात करते पाए जाते हैं, तो कभी हिन्दुओं के लिए नए नए चुनावी वादे करते पाए जाते हैं | लगभग हर एक सेक्युलर नेता अब खुद को हिन्दू साबित करने में लगा है और कुछ तो अब खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण तक बताने लगे हैं | राहुल गाँधी तो न जाने अब तक कितने मंदिरों के चक्कर काट चुके हैं, इस टेम्पल रन से फायदा होता नहीं दिखा तो अब मध्य प्रदेश के चुनावों में नया आइटम लेकर आये हैं कि प्रभु श्री राम जिस वन पथ पर अपने वनवास के समय चले थे अब कांग्रेस पार्टी के नेता भी चुनाव के पहले उस रास्ते पर यात्रा करेंगे और इसको “राम वन पथ गमन” कहा जा रहा है | बात यहीं तक नहीं रुकी बल्कि यह वादा भी कर दिया गया कि वो इस वन पथ का अच्छे से निर्माण कराएँगे यदि कांग्रेस चुनाव जीत जाती है तो | लगभग सभी सेक्युलर नेताओं का यही हाल होता जा रहा है, आपने पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे नेताओं को कभी मंदिर जाते, तो कभी भगवा चोला ओढ़े तो कभी भगवान का जयकारा लगाते देखा ही होगा | यह सब इस देश का अब तक का सब से बड़ा चुनावी धर्म परिवर्तन है, शायद ही किसी देश के इतिहास में कभी एक साथ इतने सारे नेताओं ने अपना चुनावी धर्म परिवर्तन किया हो | फिलहाल में इसे सिर्फ चुनावी धर्म परिवर्तन कहूंगा क्योंकि यह सब सिर्फ चुनाव के पहले ही हो रहा है, मुझे नहीं लगता कि इनको किसी तरह का कोई पश्चाताप है या अब ये सब हिन्दूहित के बारे में सोचने लगे हैं | लगता नहीं कि हिन्दू वोटर फिलहाल इनके इस चुनावी नाटक पर विश्वाश करेगा क्योंकि सिर्फ चुनाव के पहले यह सब नाटक करने से हिन्दू अपना अपमान नहीं भूल जायेंगे | जहाँ जहाँ इन सेक्युलर पार्टियों की सरकारें बची हैं वहां सरकारी नीतियों से एवं जहाँ ये विपक्ष में हैं वहाँ हिन्दू हित के लिए सरकार पर दबाव डालकर यदि ये लोग कम से कम अगले कुछ साल तक तो लगातार हिन्दू हित का काम करते रहें और यह सब सिर्फ चुनाव के समय नहीं बल्कि बाकि समय भी करते रहें तब जाकर शायद हिन्दुओं का इनके प्रति गुस्सा कुछ कम हो भी जाये | सिर्फ चुनावी टेम्पल रन से तो कुछ हासिल नहीं होने वाला |

यह हिन्दुओं की जीत की सिर्फ शुरुआत भर है | यदि हिन्दू ऐसे ही एक होकर एक बड़ा वोटबैंक बना रहा और सिर्फ उसको वोट देता रहा जो कि हिन्दू हित की सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी करे तो विश्वाश कीजिये कि किसी भी नेता की इतनी हिम्मत नहीं होगी कि हमारा, हमारे धर्म का और हमारे आराध्यों का अपमान करे या फिर हिन्दुओं पर किसी तरह का कोई जुल्म करे या हमारे खिलाफ कोई षड़यंत्र करे | और न ही किसी नेता की इतनी हिम्मत होगी कि चुनाव जीतने के बाद हिन्दू हित का काम न करे | यही समय है, साथ रहिये और इन सभी राजनैतिक दलों को मजबूर करते रहिये कि वो हमारी भी सुनें, हमारे हित के भी काम करें और सब से बड़ी बात कि न तो हमारे आराध्यों एवं धर्म का अपमान करें और न ही हमारा | वोट देते समय तुलसीदास जी का यह दोहा जरूर याद रखिये –

जाके प्रिय न राम बैदेही, तजिये ताहि |
कोटि बैरी सम, जद्दपि परम सनेही ||