आतंकियों के हमदर्द तथाकथित मानवाधिकार संगठनों को अब रोहिंग्या घुसपैठियों से हमदर्दी

इस देश को बाहरी आतंकवादियों से साथ साथ देश में भीतर छुपे आतंकवादियों के हमदर्दों खिलाफ भी कार्यवाही करनी होगी | जब भी कई साल तक चले केस के बाद जैसे तैसे भारतीय न्याय व्यवस्था किसी आतंकवादी को फांसी की सजा देती है तो ये लोग उस फांसी के खिलाफ खड़े हो जाते हैं और वजह बताते हैं कि ऐसा वो इसलिए कर रहे हैं क्योंकि फांसी की सजा मानवता के खिलाफ है | यदि सच में वो लोग मानवता वाले इस बयान पर कायम हैं तो देश में अन्य अपराधों में हुईं फांसी की सजा पाए अपराधियों को बचाने आगे क्यों नहीं आते, बस आतंकवादियों की मिली फांसी ही इनको मानवता के खिलाफ लगती है क्या ? कश्मीर में पत्थरबाजों पर पैलेट गन चलायी जाना इनको गलत लगता है लेकिन राम रहीम को सजा मिलने पर हरयाणा और पंजाब में हुई हिंसा में यही लोग सरकार पर पैलेट गन चलाने के लिए दवाब डालते हुए नजर आये थे | इन लोगों को AFSPA से भी समस्या है और ये चाहते हैं कि कश्मीर सहित ऐसे सभी क्षेत्रों से सेना को हटाया जाना चाहिए जबकि इन संवेदनशील क्षेत्रों से सेना के हटाए जाने से सिर्फ भारत विरोधी शक्तियों को ही फायदा होगा यह बात सभी जानते हैं | इनमें से कई लोग भारतीय सेना को बलात्कारी भी बोल चुके हैं | कश्मीर में कोई पत्थरबाज जख्मी भी हो जाये तो ये लोग प्रदर्शन करने निकल पड़ते हैं लेकिन जब सेना का कोई जवान शहीद या घायल होता है तो उसके लिए एक शब्द तक नहीं बोलते |

अब आतंकियों की हमदर्द यह टोली आजकल म्यांमार से आये रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के फैसले के खिलाफ खड़ी है | इस टोली में कई नेता और पत्रकार भी शामिल हैं | हालाँकि ये लोग कभी किसी अन्य धर्म के शरणार्थियों के समर्थन में कभी खड़े नहीं हुए परन्तु कल जी न्यूज़ पर इस मुद्दे पर चल रही एक बहस में यह जता रहे थे कि उनका रोहिंग्या मुसलमानों को समर्थन देना मानवधर्म की वजह से है न कि उनके मुसलमान होने की वजह से | वैसे तो अब ऐसे लोग जिस किसी का भी समर्थन करें उसको शक की नजर से देखना अब स्वाभाविक ही है क्योंकि इन लोगों का अब तक का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है | अब जरा यह समझते हैं कि रोहिंग्या मुसलामानों को अपना देश छोड़कर दुसरे देशों में शरणार्थी क्यों बनना पड़ा | वैसे तो म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का विरोध वहां की सरकार और बौद्ध नागरिकों से कई सालों से चल रहा है लेकिन नया मामला है २०१६ का जिसमें हराका अल यकीन नामक रोहिंग्या आतंकवादी संगठन म्यांमार बॉर्डर गार्ड पोस्ट पर हमला कर के वहां के ९ जवान मार दिए और इसके बाद जब वहां की सेना ने जवाबी कार्यवाही शुरू की तो रोहिंग्या मुसलमान दूसरे देशों में शरण लेने लगे | खुफिया एजेंसियों की जांच से यह भी पता चला है कि आई. एस. आई. एस. एवं पाकिस्तान समेत दुनिया के कई छोटे बड़े आतंकी संगठन रोहिंग्या मुसलमानों को साथ मिलकर एशिया के हमारे इस भूभाग में अपनी शक्ति बढ़ाकर आतंकवाद फैलाना चाह रहे हैं | ऐसे में कौन सा समझदार देश रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देगा ? लेकिन भारत में छुपे आतंकियों के ये हमदर्द रोहिंग्या मुसलमानों के भी समर्थन में खड़े हैं और रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के सरकार के फैसले के विरोध में बाकायदा कोर्ट में अपील भी कर दी गयी है | एक तरफ तो यह लोग कश्मीर में धरा ३७० हटाने का विरोध करके यह लोग एक तरह से भारत के अन्य क्षेत्रों से लोगों के कश्मीर में बसने का विरोध करते हैं और वहीँ दूसरी तरफ रोहिंग्या मुसलमानों को वहां से हटाए जाने का भी विरोध कर रहे हैं | मतलब कि सीधे सीधे कहा जाये तो विरोध बस गैर-मुस्लिमों के कश्मीर में बसने से है ?

उम्मीद करता हूँ कि देश की न्याय व्यवस्था और सरकार इन लोगों के आगे नहीं झुकेगी और जल्द से जल्द रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने की व्यवस्था करेगी | भारत पहले ही अपने भीतर छुपे आतंकियों के कई हमदर्दों से जूझ रहा है ऐसे में और नया सर दर्द लेना बेवकूफी ही होगी | साथ ही न्यायालयों को भी ऐसे मामलों में केस स्वीकार करने के पहले उनके वकीलों और समर्थक संगठनों से पूछना चाहिए कि हर बार वो ऐसे मुद्दों पर ही क्यों मानवाधिकार का झंडा लेकर खड़े होते हैं | ऐसे कई संगठनों को होने वाली फंडिंग की जांच तो सरकार ने पहले ही शुरू कर दी है, उम्मीद है कि आने वाले समय में कई ऐसे संगठनों की पोल इन जांचों में खुलेगी |

( फोटो साभार – The Indian Express )