पत्रकारों ने लगाये अमिताभ जी पर झूठे आरोप, सच सामने आने पर कितनों ने मांगी माफ़ी ?

योग्यता की जगह चमचागिरी एवं बेईमानी से जो व्यक्ति शीर्ष पद प्राप्त करता है, वह कभी उस पद की गरिमा एवं दायित्वों का निर्वाह ईमानदारी से नहीं करता है | यही वजह है कि इस देश के कई पत्रकार अपने पद की गरिमा एवं दायित्वों का ध्यान रखने की जगह उस पद को बदनाम करने में जुटे हुए हैं |

ये विवाद काफी सुखियां बटोरे हुए है कि अमिताभ बच्चन जी ने भारत पाकिस्तान के मैच में राष्ट्रगान गाने के पैसे लिए या नहीं | कुछ पत्रकारों ने बिना किसी जांच पड़ताल के अमिताभ जी पर राष्ट्रगान गाने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया और बस फिर पूरी ताकत से जुट गए अमिताभ जी की छवि ख़राब करने में | पूरे विवाद के बीच बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरव गांगुली जी ने सामने आकर यह बात साफ़ की कि अमिताभ जी ने इस के लिए एक पैसा भी नहीं लिया बल्कि उन्होंने तो अपने आने जाने एवं रुकने तक का खर्च नहीं लिया |

अब जबकि यह बात साफ़ हो गयी है कि अमिताभ जी पर लगाये गए ये आरोप झूठे हैं, अब वो सारे आरोप लगाने वाले पत्रकार एवं उनके समर्थक कहाँ हैं ? क्यों अब तक अमिताभ जी से उन सभी लोगों ने माफ़ी नहीं मांगी ?

लता मंगेशकर जी, अमिताभ जी, सचिन तेंदुलकर जी आदि इस देश के उन सम्माननीय लोगों में से हैं जिन्हें हमेशा ही इस देश की जनता ने प्यार और सम्मान दिया | पहली बात तो ये कि ऐसे लोगों पर कोई कैसे झूठे आरोप लगा सकता है ? यदि कभी किसी ग़लतफ़हमी की वजह से किसी से कोई झूठा आरोप लग भी गया तो उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है सार्वजनिक रूप से अपनी गलती की माफ़ी मांगे | जब गलती खुले आम सार्वजनिक तौर पर मीडिया या सोशल साइट्स पर की जाये तो उस की माफ़ी भी उसी तरह सार्वजानिक तौर पर मीडिया और सोशल साइट्स पर मांगी जानी चाहिए ताकि सभी को सच का पता चले |

इस देश की मीडिया के लिए इस तरह से बस टी आर पी के लिए सम्माननीय व्यक्तियों पर झूठे आरोप लगाना कोई नयी बात नहीं है | यही होता है कि पहले तो झूठी रिपोर्ट चलाकर  दिन रात ढिंढोरा पीट पीट के हल्ला मचाओ और व्यक्ति को बदनाम करो और जब सच सामने आये और ये पता चले के वो रिपोर्ट झूठी थी तो बिना माफ़ी मांगे चुप्पी मार के बैठ जाओ |

इस देश के सम्माननीय व्यक्तियों का ये बड़प्पन है कि कई बार वो ऐसी हरकतों को अनदेखा कर देते हैं और हरकत करने वालों पर भारतीय कानून के अनुसार कोर्ट या पुलिस के जरिये कोई कार्रवाही नहीं करते | मैं इस देश के ऐसे सभी सम्माननीय व्यक्तियों से यही अपील करता हूँ के आप कृपया ऐसे झूठे आरोप लगाने वाले पत्रकारों को माफ़ न करें और भारतीय कानून के अनुसार कोर्ट और पुलिस के जरिये उन के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाही करवाने की कोशिश करें | तभी ऐसे झूठ चलाने वाले पत्रकारों को अक्ल आएगी और वो अपने पद की गरिमा, मर्यादा एवं जिम्मेदारी समझेंगे |