और कितने जवान अपनी जान दें ? कड़ी निंदा नहीं अब इस समस्या का जड़ से खात्मा होना चाहिए |

छत्तीसगढ़ में एक नक्सली हमले में हुई जवानों की शहादत पर राजनीति फिलहाल इतनी ही सीमित रही कि सत्ता पक्ष ने हमले की कड़ी निंदा कर दी और विपक्ष ने सरकार और हमले दोनों की | परन्तु इस कड़ी निंदा से होगा क्या ? क्या इस कड़ी निंदा से डर कर अब आगे से नक्सली इस तरह के हमले करना छोड़कर सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर देंगे ? मोदी सरकार ने पहले भी कुछ मौकों पर यह साबित किया है कि यदि वो चाहे तो ऐसे हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे सकती है | अब इस बार ऐसा कोई जवाब मोदी सरकार देगी या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा |

जब ऐसे हमलों में नक्सलियों की टोली में संख्या और हथियार हमारे सुरक्षा दलों के सदस्यों की संख्या और हथियारों से ज्यादा होने लगे तो यह समझने की जरुरत है कि हमारे सरकारी तंत्र में कोई कमी है | ऐसे हमलों के बाद आप कोई जवाबी हमला करके उसका बदला तो ले सकते हैं लेकिन शहीद हुए जवानों को वापस जिन्दा नहीं कर सकते | अतः जवाबी हमले के साथ साथ इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि आगे से ऐसे हमले या तो हों ही न और अगर हों भी तो हमारे जवानों के पास संख्या, सामग्री और अधिकार इतने हों कि बिना अपने किसी बड़े नुकसान के वो उस हमले का मुंह तोड़ जवाब दे पायें | जवानों की भावना, देशभक्ति और क्षमता पर मुझे कोई शक नहीं है परन्तु यदि उन से कहीं ज्यादा संख्या और हथियारों के साथ दुश्मन उन पर हमला करेगा तो जवान अपनी दिलेरी और कुशलता से हमले में शहीदों की संख्या कम तो कर सकते हैं परन्तु शायद शून्य न कर पायें |

सबसे पहले तो इस हमले की जवाबी हमले की जिम्मेदारी अब सेना को देकर नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया जाना चाहिए | जिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में AFSPA लगाने की जरुरत है वहाँ AFSPA लगायी जानी चाहिए और जहाँ फिलहाल AFSPA की आवश्यकता नहीं है वहाँ भी सेना को आवश्यक अधिकार और सामग्री देकर सुरक्षा की जिम्मेदारी दे दी जानी चाहिए ताकि वहाँ हालात काबू से बाहर जाने के पहले ही सुधारे जा सकें | ऐसा करने से कई तथाकथित एक्टिविस्ट सामने आएंगे ही क्योंकि इस देश की आस्तीन में साँपों की कोई कमी नहीं है | ऐसे देशद्रोही लोग कभी मानवाधिकार का हवाला देकर तो कभी सेना पर कोई और झूठे आरोप लगाकर ऐसे क्षेत्रों में सेना की मौजूदगी का विरोध जरूर करेंगे लेकिन ऐसे लोगों की बातें सुनने की कोई आवश्यकता नहीं है | कड़ी निंदा से राजनीति तो शायद चल सकती है परन्तु देश की सुरक्षा नहीं की जा सकती |

मोदी सरकार से मैं यही मांग करता हूँ कि सर्जिकल स्ट्राइक की ही तरह इस बार नक्सलियों पर भी कोई बड़ा जवाबी हमला करे और साथ ही भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए अब सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा एवं नक्सलियों के खात्मे की जिम्मेदारी पूरी तरह से सेना को दे दें |

(फोटो साभार – livemint.com)