राजनीति एवं पत्रकारिता के गठबंधन के दौर में मीडिया के भ्रष्टाचार पर सरकारी कार्यवाही सराहनीय

A view of the Indian Parliament building.

पिछले कुछ दशकों में देश में मीडिया की ताकत बहुत ज्यादा बढ़ी है | मीडिया की पहुँच अब देश की ज्यादातर आम जनता तक है | वैसे तो ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आनी चाहिए थी लेकिन जिम्मेदारी के स्थान पर भ्रष्टाचार में हिस्सेदारी आ गयी | इस हिस्सेदारी के मिलने का कारण था भ्रष्टाचारियों का पोल खुलने का डर | धीरे धीरे फर्जी ओपिनियन पोल, सर्वे, खबरों में शब्दों के हेर फेर कर के अर्थ का अनर्थ करके, व्यक्ति एवम पार्टी विशेष का एजेंडा चलाते हुए अन्य पार्टियों के खिलाफ रिपोर्टिंग करके, किसी पार्टी विशेष के खिलाफ एवम किसी और पार्टी के समर्थन में खबरें चालकर एवं ऐसे कई अन्य अनैतिक रास्तों से मीडिया ने इस देश की राजनीति में बहुत बढ़ा स्थान बना लिया | टी. वी. पर आने वाले रिपोर्टर आज बड़े बड़े मंत्रियों जैसी पहुँच एवम हैसियत रखते हैं और इस शक्ति का कारण उनकी न्यूज़ एजेंसी रुपी ब्रह्मास्त्र है जो की किसी भी चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है | शायद कुछ इन्ही सब खतरों का डर था जो कई मौकों पर राजनैतिक दलों में मीडिया के खिलाफ कार्यवाही करने की इक्षाशक्ति नहीं दिखी | कल एन. डी. टी. वी. के प्रणय रॉय के ठिकानों पर सी. बी. आई. ने छपे मारे | जिस देश में राजनीति और पत्रकारिता ने गठबंधन कर लिया हो उसमें किसी सरकार को मीडिया के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करते देख बहुत ही सुखद आश्चर्य हुआ | यह सराहनीय कदम है |

मुझे लगता है कि आज बेईमान लोगों के लिए धन और शक्ति जल्दी से कमाने का बहुत बढ़िया जरिया है एक न्यूज़ चैनल, न्यूज़ पेपर या न्यूज़ वेबसाइट खोल लेना | बस शुरूआती इन्वेंस्टमेंट और उस के बाद आप किसी राजनैतिक दल के ऑफिस में जाकर खुद को बेच दीजिये और फिर बस उस पार्टी के एजेंडे को दिन रात अपने न्यूज़ चैनल, न्यूज़ पेपर या वेबसाइट पर चलाइये और नोट कमाइए |

ऐसे अनगिनत न्यूज़ चैनल, पेपर और वेबसाइट इस समय इस काम में दिन रात लगे हुए हैं | आपको इनकी न्यूज़ से ही अंदाज़ा लग जायेगा कि ये किस राजनैतिक दल के ऑफिस में जाकर बिका है | लोकतंत्र का कथित चौथा स्तम्भ ही जब ऐसा बिकाऊ हो तो फिर क्या होगा इस लोकतंत्र का | यही वजह है कि यदि आज कोई न्यूज़ एजेंसी सच का साथ देकर सही न्यूज़ दिखाने की कोशिश भी करे तो जनता को उस पर विश्वाश नहीं होता और जनता ये समझने की कोशिश करती है कि ये किस पार्टी के कहने पर हो रहा होगा | मैं ये नहीं कहूँगा कि पत्रकारिता से जुड़े सारे लोग ही बिके हुए हैं | इनमें से कई ईमानदार और निस्पक्ष भी हैं |

इन सभी बिकाऊ न्यूज़ एजेंसी के पत्रकारों को देखिये अब आप | उन के फेसबुक या ट्विटर अकाउंट पर जाकर उन के मैसेज पढ़िए | वो तो कहीं से भी दूर दूर तक निस्पक्ष नहीं हैं | बस दिन रात एक एजेंडा कि आज इस नेता/पार्टी के खिलाफ बोलो और कल उस नेता/पार्टी के | इन की कमाई का भी कोई ठिकाना नहीं है | एक न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार की आखिर कितनी वैद्य तनख्वाह होगी ? लेकिन इन लोगों के ठाटबाट देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी असली कमाई कितनी ज्यादा है | आखिर कहाँ से आ रहा है इतना पैसा ? कौन दे रहा है और किसलिए दे रहा है ?

इस देश में हुए कई विवादों पर इन पत्रकारों की प्रतिक्रिया ही देख लीजिये | किस दंगे को दंगा मानना है और किसे बस दो गुटों की लड़ाई, किस भ्रष्टाचार को भ्रष्टाचार मानना है और किसे बस हिसाब किताब में अनजाने में हुई गलती, किस भाषण को भड़काऊ मानना है और किसे बस गुस्से और दर्द में निकले हुए शब्द, किस भाषण को देशविरोधी मानना है और किसे अभिव्यक्ति की आज़ादी, किस नेता को अनपढ़ मानना है और किसे शिक्षित न होते हुए भी महाज्ञानी, किस व्यक्ति के पास से हथियार बरामद होने पर उसे अपराधी मानना है और किसे बस मासूम, किस व्यक्ति के द्वारा शराब पी कर गाडी चलाने से लोगों के मरने पर उसे सजा होनी चाहिए और किस व्यक्ति द्वारा ऐसा करने पर उसे बेक़सूर कहना चाहिए, किस नेता के बेटे या बेटी के राजनीति में आने पर उसे उस की क़ाबलियत का परिणाम बताना है और किस नेता के बेटी/बेटे के राजनीति में आने को परिवारवाद ? हार्दिक पटेल, कन्हैया कुमार, उमर खालिद आदि लोगों को किस ने चमकाया ? किस ने इनको इस देश की आवाज और भविष्य साबित किया ? ये सब इन्ही लोगों के फैलाये हुए झूठ के उदाहरण हैं |

यहाँ मैं नेताओं की बात नहीं करूँगा क्योंकि भारतीय राजनीति में व्यक्ति/पार्टी विरोध में किसी भी गलत इंसान को सही और सही इंसान को गलत की तरह बताना कोई नयी बात नहीं है | लेकिन अब हमारे कथित निस्पक्ष मीडिया के लोग भी इसी काम में जुटे हुए हैं | पहले कम से कम टी. आर. पी. के चक्कर में ही ये लोग कुछ सही न्यूज़ दिखा देते थे लेकिन अब तो वो भी डर नहीं है | क्या करना है टी. आर. पी. का जब कि राजनैतिक पार्टियों और देशविरोधी ताकतों द्वारा ही इतनी कमाई हो जाती है |

खैर ये तो नहीं सुधरेंगे | जनता से हम यही कहेंगे कि ऐसे बिकाऊ भ्रष्ट न्यूज़ चैनल, पेपर और वेबसाइट को देखना/पड़ना बिलकुल बंद कर दीजिये | इन पर आपको सिर्फ झूठ बोलकर गुमराह ही किया जायेगा |