कहानी: भारतवर्ष २०२९ – मोदी जी की आयेदिन की सर्जिकल स्ट्राइक्स की वजह से उपजी एक कल्पना

इसे फिलहाल सिर्फ एक कहानी की तरह पढ़ें और आनंद लें | बिना बात के ही मुझे भक्त या आर. एस. एस. का एजेंट कहा तो आपको पाप पड़ेगा |

वर्ष २०२९ शुरू हो रहा है | कयास लगाए जा रहे हैं, मोदी विरोधी मीडिया एवं सोशल साइट्स के धुरंदर लोग सोशल साइट्स पर ओपिनियन पोल कर रहे हैं, विषय है – क्या मोदी जी इस बार भी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनकर विपक्षियों की उम्मीदों पर सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे या फिर विपक्ष को भी सपने देखने का एक मौका देंगे | मोदी विरोधी मीडिया इस सवाल का जवाब इसलिए ढूंढ रही है ताकि पता चल सके कि इस बार के चुनावों में ओपिनियन और एग्जिट पोल पर पैसे खर्च करने हैं या नहीं | वहीँ दूसरी ओर लोकसभा एवं राज्यसभा में शून्य सीट वाले फटेहाल विपक्षी दल यह जानना चाहते हैं कि वो इस बार चुनाव लड़कर अपना समय और पैसा बर्बाद करें या नहीं | अब काला धन खत्म हो जाने की वजह से इन दोनों ने ही फिजूलखर्ची बिलकुल बंद कर दी है और ये लोग अब पैसा वहीँ खर्च करते हैं जहाँ कोई लाभ की गुंजाईश हो | सालों से बेरोजगार हुए इन लोगों को फर्जी की मटरगश्ती के अलावा घर भी चलाना होता है जनाब | मोदी राज में केवल यही दोनों समूह बेरोजगार हैं, बाकी का भारत खुशहाली और आनंद के साथ जी रहा है |

वर्ष २०२९ का भारत वर्ष २०१४ के भारत से बिलकुल अलग है | स्कूल में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चों को इतिहास विषय में पढ़ाया जाता है कि इस देश में ब्लैक मनी नाम की एक चीज हुआ करती थी जिसका खात्मा मोदी राज में हुआ, भारत का एक दुश्मन देश हुआ करता था जिसका नाम पाकिस्तान था, बलूचिस्तान पहले एक आजाद देश नहीं था, चीन ने किसी जमाने में हमारी काफी जमीन पर कब्ज़ा किया हुआ था, आज की फटेहाल शून्य सीट वाली कांग्रेस ने कभी इस देश पर कई सालों तक राज किया था, इस देश को विकसित देश बनने में इतने साल कैसे लग गए, वो कौन सी जड़ी बूटी है जिस को खाकर कांग्रेस के युवा नेता राहुल गाँधी आज भी युवा हैं | इस तरह के और भी कई ऐतिहासिक और इंटरेस्टिंग टॉपिक हैं जो कि २०१४ में काल्पनिक लगते थे लेकिन २०२९ में सच्चाई हैं | लेकिन बच्चे तो बच्चे हैं, उनका कहाँ मन लगता है इतिहास पढ़ने में |

हाँ, अभी बता देता हूँ कहीं बाद में बताना न भूल जाऊं कि कांग्रेसियों को २०२९ में भी राहुल गाँधी जी के युवा नेतृत्व की वजह से पार्टी के वापस ताकतवर बनने की उम्मीद है, अरविन्द केजरीवाल जी कई बार अपने पुराने काण्डों के लिए दिल्ली की जनता से माफी मांग चुके हैं लेकिन जनता उनको फिर से मौका देने तैयार ही नहीं है, दिल्ली में राशन कार्ड छापने की प्रथा आम आदमी पार्टी की सरकार जाते ही खत्म हो गयी थी और अब आज की दिल्ली में महिलाएं बेखौफ हैं, नितीश कुमार जी आज भी सारी विपक्षी पार्टियों को एक महागठबंधन में लाकर मोदी जी को हराकर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं हालाँकि उनकी अपनी पार्टी कब का उनको पार्टी से बाहर निकालकर लालू जी की पार्टी में विलय कर चुकी है, लेफ्ट पार्टी वाले और यू पी के हाथी और साइकिल वाले तो बहुत पहले ही राजनीति छोड़कर दूसरे काम धंधे में लग चुके हैं |

कल ही की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी जी अपने बिलकुल लंगोटिया मित्र जैसे पुतिन बाबू के साथ कैमरे पर हँस हँस के बात करते हुए देखे गए | दोनों ही बड़ी खतरनाक टाइप की हंसी हंस रहे थे | पूरा विश्व सकते में है कि ये दोनों अब मिलकर क्या नयी खिचड़ी पका रहे हैं | दुनिया आज भी नहीं भूली है कि किस तरह इन दोनों ने मिलकर भारत-अमेरिका की दोस्ती का नाटक करके चीन और पाकिस्तान की लंका लगा दी थी | देखो अब क्या होता है | कुछ दिन में पता चलेगा कि यह हंसी सिर्फ चाय पर चर्चा के बीच किये किसी मजाक या चुटकुले की वजह से थी या ये दोनों मिलकर कोई नया काण्ड करने वाले हैं |

खैर वापस अपने शुरू की मुख्य बात पर आते हैं कि मोदी जी अब फिर से चुनाव लड़ेंगे या अब राजनीति से सन्यास लेंगे | अब ये निर्णय तो उनको ही लेना है | देखिये क्या होता है | जनता तो यही चाहती है कि मोदी जी इस बार भी चुनाव लडें और फिर से देश के प्रधानमंत्री बनें |