जे एन यू मुद्दे पर फिर हुई गन्दी राजनीति

जे एन यू में देशद्रोही नारेबाजी के आरोपियों के समर्थन में मंगलवार (२३ फ़रवरी) को दिल्ली में एक प्रदर्शन हुआ | अरविन्द केजरीवाल और राहुल गांधी ने इस पूरे प्रदर्शन का जोर शोर से समर्थन किया |

अभी कुछ दिन पहले जे एन यू में हुई देशद्रोही नारेबाजी के खिलाफ सेना के पूर्व जवानों ने दिल्ली में एक आंदोलन किया था | इन नेताओं ने इस आंदोलन पर न तो किसी तरह की कोई टिप्पणी की न ही किसी तरह का कोई समर्थन दिया |

कुछ दिन पहले दिल्ली में वकीलों ने भी इस देशद्रोही नारेबाजी के खिलाफ प्रदर्शन किया | उन का भी इन नेताओं ने किसी तरह का कोई समर्थन नहीं किया |

आखिर अपने समर्थकों को क्या सन्देश देना चाहते हैं ये लोग ? देशद्रोही नारेबाजी देशद्रोह नहीं बस अभिव्यक्ति की आजादी है, ये बात तो ये लोग काफी पहले से ही जता रहे हैं | देशद्रोही नारेबाजी का विरोध करने वालों का साथ न देकर ये अपने समर्थकों को यह सन्देश भी दे चुके हैं कि देशद्रोह के खिलाफ किसी भी आंदोलन का साथ मत दो |

देशद्रोही नारेबाजी अभिव्यक्ति की सही आज़ादी और देशद्रोह का विरोध गलत ? भगवान न करें कहीं इन के सारे समर्थक, जो कि बड़ी संख्या में हैं, इन्ही के बताये रास्ते पर चल पड़े तो फिर तो कई शहरों में आये दिन इसी तरह अभिव्यक्ति की आज़ादी का बेशर्मी से प्रदर्शन होगा और देश का नाम सारी दुनिया में रोशन होगा | हो सकता है जल्दी ही कहीं कोई रिकॉर्ड बुक में नाम भी दर्ज़ हो जाये ऐसे इकलौते देश के रूप में जहाँ देशद्रोही नारेबाजी देशद्रोह नहीं अभिव्यक्ति की आज़ादी है | मुझे लगता है कि ये सही समय है इन नेताओं से यह पूछने का कि इन की राय में विद्यालयों में बच्चों से “भारत माता की जय” के नारे लगवाने चाहिए या फिर “भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी” वाले नारे |

हम अपने लेखों के माध्यम से ऐसे सभी नेताओं से पहले भी कई बार कह चुके हैं और आज भी कह रहे हैं कि अपनी गन्दी राजनीति के लिए इस देश को शर्मिंदा करना बंद कीजिये | आपस में एक दूसरे का राजनैतिक विरोध जितना करना है करते रहिये लेकिन कम से कम इस देश की एकता और अखंडता पर हमला करने वालों के खिलाफ तो एक जुट होकर दिखाईये | खिलाफत करना तो बहुत दूर की बात यहाँ तो उल्टा उनका समर्थन किया जा रहा है |

देखते हैं कि ये सब और कितने दिन चलता है | अच्छा है, जे एन यू मामले की वजह से ऐसे नेताओं की सोच तो जनता को पता चली | आखिर ये तो पता चल गया अब जनता को कि ये लोग वोट के लिए कुछ भी कर सकते हैं फिर चाहे वो देशद्रोह के आरोपियों का समर्थन की क्यों न हो |