प्रधानमंत्री के खिलाफ फतवा फिर साबित करता है कि झूठा सेकुलरिज्म तालिबानी युग की ओर धकेलेगा

हिंदुओं के घरों एवं मंदिरों पर बम से हमले, भाजपा एवं संघ के नेताओं पर जानलेवा हमले, बांग्लादेशी घुसपैठियों की लगातार बढ़ती शक्ति, सरकार एवं मुख्य विपक्षी पार्टियों लेफ्ट तथा कांग्रेस की इन सभी मामलों पर चुप्पी तथा देश एवं समाज के खतरनाक ऐसे लोगों का प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन, प्रधानमंत्री के खिलाफ शाही इमाम द्वारा फतवा वो भी सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की मौजूदगी में | प. बंगाल में किस तरह हालात बेकाबू होते जा रहे हैं इस बारे में आप सभी ने कई समाचार पढ़े ही होंगे | ममता बेनर्जी का झूठा सेकुलरिज्म उनको ऐसे सभी मामलों पर चुप्पी साधे रखने तथा कार्यवाही न करने के लिए मजबूर किये हुए है | झूठे सेकुलरिज्म के इन सभी ठेकेदारों को कोई फर्क नहीं पढता कि जनता परेशान है, जिए या मरे | इनकी कोशिश यही रहती है कि किसी भी तरह बस झूठे सेकुलरिज्म तथा तुष्टिकरण की राजनीति को कोई आंच ना आने पाए अब इस कोशिश में कई मासूमों की जान जाती है तो चली जाये |

सबसे पहले तो इस देश का दुर्भाग्य यह है कि यहाँ वो व्यक्ति सेक्युलर नहीं कहलाता जो कि सभी धर्मों के लोगों का शुभचिंतक हो और उनको एक नजर से देखता हो | यहाँ सेक्युलर उन ढोंगी लोगों को कहा जाता है जो कि विभिन्न मुस्लिम आयोजनों में टोपी पहन के जाते हैं लेकिन असलियत में मुसलमानों को टोपी पहनाते हैं यानि कि बेवकूफ बनाते हैं और साथ ही आये दिन हिन्दू धर्म की आस्था पर सवाल उठाते हुए हिंदुओं का अपमान करते हैं तथा हमेशा हिन्दू विरोधी नीतियों का ही समर्थन करते हैं |

इस देश की सेक्युलर जमात हमेशा अल्पसंख्यकों को बराबर अधिकार देने की बात करती है लेकिन साथ ही यूनिफार्म सिविल कोड यानि कि सामान नागरिक संहिता का विरोध करती हैं, तीन बार तलाक कहकर मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले अत्याचार का विरोध करने की जगह इस कानून का समर्थन करती है, हिन्दू धर्म के आयोजनों का यह कहकर विरोध करती है कि इस से मुसलमानों की भावनाएं आहत होती हैं, गुजरात दंगों को दंगा मानती है लेकिन गोधरा कांड को एक ऐसी छुटपुट घटना मानती है जिसका कि किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं था, जय श्री राम बोलने को सांप्रदायिक कहती है और अल्लाह हु अकबर कहने को धर्मनिरपेक्षता, सभी मुस्लिम त्योहारों के मनाये जाने का समर्थन करती है परंतु हिन्दू धर्म के त्योहारों को क्यों नहीं मनाया जाना चाहिए उस पर ज्ञान देती है, एक तरफ कहते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता वहीँ दूसरी ओर आतंवादियों के एनकाउंटर और सजा का विरोध यह कहकर करते हैं कि यह मुसलमानों पर अत्याचार है | कुल मिलकर सीधा सीधा बोलें तो इस सेक्युलर जमात की नजर में सेक्युलर उसको कहा जाता है जो कि मुसलमानों की हर सही गलत बात का समर्थन करे और हिंदुओं की हर सही गलत बात का विरोध |

आतंकी इशरत जहाँ समते कई आतंकियों के एनकाउंटर का विरोध, अफजल गुरु एवं अन्य कई आतंकियों की फांसी का विरोध तथा ऐसे आतंकियों को शहीद बताना, २६/११ के हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की जगह भगवा आतंक जैसे काल्पनिक शब्दों का आविष्कार करना आदि ऐसे कई मामले हैं जिनमें इन झूठे सेक्युलर लोगों ने खुले आम आतंक का साथ दिया |

इस देश के सेकुलरिज्म को गौर से देखें तो यह सीधे तौर पर तालिबानी सोच वाली शक्तियों को प्रोत्साहन देता है तथा हिंदुओं एवं अन्य शांतिप्रिय धर्मों / लोगों का विरोध करता है तथा उनका अपमान करता है | सेक्युलरिस्म के ऐसे ठेकेदारों की वजह से ही आज इस देश में सेक्युलर और धर्मनिरपेक्ष शब्द गाली बन के रह गए हैं |

इन सभी झूठे सेक्युलर लोगों की ताकत इस देश की जनता का वो हिस्सा है जो कभी जाति तो कभी धर्म और तो कभी रुपये के नाम पर इनको वोट देकर इनको मजबूत बनाती है | जनता के इस हिस्से को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीतने के बाद ये लोग क्या करते हैं और क्या नहीं | बस ये लोग अपनी जाति, धर्म और वोट के बदले मिले रुपये से खुश हैं | इस देश की जनता अब भी नहीं सुधरी तो फिर इस देश के भगवान ही मालिक हैं |