प. बंगाल में हिंदुओं पर हुए हमले का जिम्मेदार कौन ? कथित धर्मनिरपेक्ष नेता या स्वयं हिन्दू ?

ये बात किसी से छुपी नहीं है कि इस देश में कथित धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दल एवं बिकाऊ न्यूज एजेंसियां काफी समय से हिंदुओं को महामूर्ख एवं कायर ही मानते आये हैं | जब भी हिंदुओं पर किसी तरह के हमले होते हैं तो उन दंगाइयों को बचाया जाता है तथा उस घटना को धार्मिक दंगा कहने की जगह छुटपुट संघर्ष का नाम दे दिए जाता है और यदि कहीं हिन्दू इन हमलों के जवाब में कोई हमला करने की कोशिश भी कर दें तो तुरंत विभिन्न तरह की सैन्य फोर्स को बुलाकर एक तरफ तो उस हमले का दमन कर दिया जाता है और वहीँ दूसरी ओर इस जवाबी हमले को धार्मिक दंगा बोलकर दूसरी तरफ के लोगों को विभिन्न तरह के मुआवजे दे दिए जाते हैं और हिंदुओं पर कई तरह की धाराएं लगाकर उनको जेल भेज दिया जाता है | ये कथित धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दल एवं बिकाऊ न्यूज एजेंसियां हिन्दू धर्म की मान्यताओं का मजाक उड़ाते हैं तथा उनका विरोध करते हैं |

सेकुलरिज्म का असली मतलब “सर्व धर्म सम भाव” है लेकिन इस देश में सेकुलरिज्म के नाम पर सिर्फ हिन्दू विरोधी घटिया राजनीति ही की जाती रही है | अब ऐसा करने वालों को फंडिंग कहाँ से आ रही है उस का भी धीरे धीरे खुलासा हो ही रहा है | कोई बड़ी बात नहीं होगी यदि आने वाले समय में हमें पता चले कि इन सभी तथाकथित सेक्युलर नेताओं, राजनीतिक पार्टियों एवं पत्रकारों की फंडिंग भी किसी न किसी ऐसी संस्था से हो रही है जो कि भारत में हिंदुओं को अन्य धर्मों में धर्मान्तरण के लिए उकसाना चाहती हैं |

प. बंगाल में हिंदुओं के घरों एवं मंदिरों पर देशी बम से हमले हुए | ये सिर्फ एक दंगा नहीं बल्कि आतंकवादी हमला है क्योंकि दंगों में बमों का इस्तमाल नहीं होता | लेकिन कितने राजनैतिक दल एवं न्यूज एजेंसियां इस हमले का विरोध कर रहे हैं ? सिर्फ भाजपा एवं जी न्यूज ने इन हमलों का विरोध किया है और प. बंगाल की ममता सरकार पर दवाब बनाकर दंगाइयों पर कार्यवाही की मांग की है | हालाँकि ममता बेनर्जी अपनी वोट बैंक की राजनीति के कारण कभी भी इन दंगाइयों पर कोई कार्यवाही नहीं करने वाली | ये भारत में हिंदुओं पर होने वाला कोई पहला हमला नहीं है | पहले भी कई बार इस देश में हिंदुओं पर हमले हुए और अन्याय हुआ है |

अगर आप भूल गए हों तो आपको याद दिला दूं भारत हिन्दू बाहुल्य देश है | भारत एकलौता ऐसा देश है जहाँ उस धर्म पर सबसे ज्यादा हमले एवं अन्याय होते हैं जो कि मेजोरिटी में है | इस सब के लिए असली जिम्मेदार कौन है ? तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दल या स्वयं हिन्दू ? मेरी व्यक्तिगत राय में तो इस सब के लिए स्वयं हिन्दू जिम्मेदार है |

संगठित रहना तो हिन्दू कई सालों पहले ही भूल चुके हैं | कई बार मैंने लोगों को ऐसे मैसेज शेयर करते देखे जिन में दलितों को यह कह कर भड़काया जाता है कि “जो धर्म तुम्हें नीच या दलित कहे तुम उस धर्म को लात मार दो” | एक सोची समझी साज़िश के तहत विदेशी शक्तियों के दवाब में लिखे गए झूठे इतिहास और हिन्दू धर्म ग्रंथों के गलत ट्रांसलेशन को हमारे समाज में कुछ इस तरह घोल कर पढ़ा दिया गया है कि अब सभी को लगता है कि भेदभाव, ऊंच नीच आदि कुरुतियां हिन्दू धर्म में शुरू से ही थीं | यदि ये सब सत्य होता तो किसी हिन्दू धर्मग्रन्थ में तो इन सब बातों का उल्लेख होता, कोई तो ऐसा ग्रन्थ होता जो कि हमें इस तरह के भेदभाव को करने की शिक्षा देता | गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कई बातों पर शिक्षा दी लेकिन उस में भी कहीं भी ऐसा नहीं कहा गया कि फलां जाति के लोग नीच होते हैं | न ही ऐसा कोई वर्णन अन्य किसी ग्रन्थ में है | सत्य तो यह है कि हिन्दू धर्म ने कभी किसी को नीच नहीं कहा और ऊंच नीच आदि कुरुतियां हिन्दू धर्म में थीं ही नहीं |

हिंदुओं को बार बार ऊंच नीच और जातियों की लड़ाई में झोंककर तोड़ा गया और इस बिखराव का उपयोग उन पर राज़ करने, धर्मान्तरण करने एवं अन्य देशविरोधी कामों के लिए किया गया | इस देश में जितने भी विदेशी शासक आये उन सब ने इस देश में फूट डालो और राज़ करो की रणनीति अपनायी और उस में काफी हद तक सफल भी रहे | इस देश का कटु सत्य यही है कि कोई भी तथाकथित सेक्युलर ताकत एवं भारत विरोधी ताकत यह नहीं चाहती कि हिन्दू एकता के साथ रहे | जितना हिन्दू टूटेगा, बिखरेगा उतनी ही ज्यादा इनकी दुकान चलेगी |

पिछले कुछ वर्षों से देश में जो हालात उत्पन्न हुए हैं उससे हिंदुओं को आत्म मंथन करने की जरूरत है | अब यहाँ सोचना हिंदुओं को है कि वो इस देश में पढाये जा रहे झूठे इतिहास पर विश्वाश करके आपस में जातियों के नाम पर लड़ते रहेंगे और ख़त्म हो जायेंगे या फिर अपने धर्मग्रंथों को पढ़कर, उनको समझकर आपस में एकता और प्रेम के साथ रहेंगे |

मैं सभी हिंदुओं से यही निवेदन करूँगा कि आप स्वयं अपने ग्रन्थ पढ़ें, जिस भाषा में वो लिखे गए हैं उस भाषा में पढ़ें न कि किसी लेखक के अनुवाद को | आप स्वयं अपने ग्रन्थ पढ़कर उन्हें समझें और उनका अनुसरण करें | एकता के साथ रहें, आपस में किसी भी तरह का कोई भेदभाव न रखें | सबसे खास बात यह कि इस देश की तथाकथित सेक्युलर जमात से दूर रहें, उनको वोट देना बंद करें और उनकी बातें सुनना बंद करें |