पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के लिए नक्सली जिम्मेदार? (एस.आई.टी.)

पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) ने उनकी हत्या के लिए नक्सलियों पर संदेह व्यक्त किया है। (स्वर्ण न्यूज की रिपोर्ट)

गौरी लंकेश कुछ दिनों से बीजी कृष्णमूर्ति, लता मुदरगा और प्रभा नाम के तीन प्रभावी नक्सलों को आत्मसमर्पण करने के लिए आश्वस्त कर रही थी। इस कारण से दूसरे समूह के एक बड़े नक्सल नेता ‘विक्रम गौड़ा’ और उसकी टीम को गौरी लंकेश से नाराजगी थी।

विदित हो कि कर्नाटक में नक्सल की दो टीमें, तुंगा और भद्र नाम से प्रख्यात हैं। तुंगा टीम विक्रम गौड़ा के नेतृत्व में था जो शिमोगा इलाके में सक्रीय है, कृष्णामूर्ति के नेतृत्व में चिकमगलूरू के आसपास के इलाकों में भद्र टीम सक्रिय है।

एसआईटी के द्वारा ऐसा कहा जा रहा है कि गौरी लंकेश ने तुंग समूह को आत्मसमर्पण करने के लिए आश्वस्त किया था। विक्रम, जो पूरी तरह से नक्सलवादियों के आत्मसमर्पण के खिलाफ था, लंकेश और उनकी टीम के प्रयासों की निंदा करता रहा है। स्वर्ण समाचार (कन्नड़ भाषा) के अनुसार, जांच करने वाली एस.आई.टी. ने कहा है कि यह पत्रकार की हत्या के कारण हो सकता है।

क्या विक्रम गौड़ा ने लंकेस को मार दिया?

एस. आई. टी. विक्रम गौड़ा की संभावना की जांच कर रहा है, इस टीम को ‘सर्वाधिक वांछित’ कहा जाता है और ऐसा माना जा रहा है कि इसने ही चिकमगलूर के आसपास के जंगलों से भागने के बाद, खुद बेंगलुरु आकर लंकेश को मार डाला। पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक सी.सी.टी.वी. फुटेज में हमलावर की ऊंचाई 5.2 से 5.4 फीट है। विदित हो की विक्रम गौड़ा की लम्बाई भी पुलिस रिकार्ड्स में इतनी ही है।

अब इस संदेह के बाद ये सवाल उठना लाजमी है की यदि पुलिस का ये शक नहीं निकला, तो क्या कथिक पत्रकार और स्वयंभू बुद्धिजीवी, जो नक्सलियों को पालते आये हैं, और इस हत्या के लिए हिन्दुत्वा को दोषी ठहरा रहे थे, क्या हिन्दुओं से माफ़ी मांगेंगे और क्या इनके विचार और व्यवहार में नक्सलियों के प्रति परिवर्तन आएगा?