कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के लिए कौन अधिक मेहनत कर रहा है – भाजपा या कांग्रेस ?

प्रधानमंत्री मोदी जी एवं भाजपा के कई नेता जनसभाओं में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगा चुके हैं और केंद्र एवं भाजपा शासित राज्यों में कई अच्छी जनहितकारी योजनाओं के जरिये वर्तमान भाजपा सरकारों को कांग्रेस की सरकारों से बेहतर साबित करने का प्रयास भी कर रहे हैं | लेकिन अब लगता नहीं कि भाजपा को कांग्रेस मुक्त भारत के लिए ज्यादा कुछ मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि जिस तरह से पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस ने कई मुद्दों पर गैरजिम्मेदाराना तरीके से राजनीति की है उस को देखकर लगता है कि जल्दी ही ये पार्टी अपना बचा खुचा जनाधार भी खो देगी |

कांग्रेस के नेताओं द्वारा अनावश्यक मुद्दों का सहारा लेकर सांसद नहीं चलने देना एवं कई जनहितकारी बिल सांसद में पास नहीं होने देना, देश में असहिष्णुता का मुद्दा अनावश्यक तरीके से बड़ा चड़ा कर पेश करना, जे एन यू  में हुई देशद्रोही नारेबाजी को अभिव्यक्ति की आज़ादी बताकर आरोपियों का समर्थन करना और इन पर सरकार द्वारा की गयी कड़ी कार्रवाही का विरोध करना, जे इन यू कांड के आरोपी कन्हैया कुमार की तुलना शहीद भगत सिंह जी से कर देना, ये सभी कांग्रेस की गलत रणनीति के कुछ उदाहरण हैं | कांग्रेस द्वारा किये गए इन सभी गैरजिम्मेदाराना कामों से जनता में इस समय काफी गुस्सा है और साथ ही साथ जनता में यह सोच और भी ज्यादा बड़ी है कि कांग्रेस इस समय एक कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन की कमी से जूझ रही है |

ये सभी काम करके कांग्रेस नेताओं ने खुद को भाजपा का स्टार प्रचारक साबित किया है क्योंकि उनके किये ये काम जनता को यही सन्देश देते हैं कि कांग्रेस को नहीं भाजपा को मजबूत बनाओ |

राहुल गांधी जी, जिन्हें कांग्रेस अपना भविष्य मानती है और अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है, वो निश्चित रूप से अभी कांग्रेस को सही दिशा में ले जाने में असफल साबित हो रहे हैं | राहुल जी तो अभी तक स्वयं को भी एक अच्छा नेता साबित नहीं कर पाए हैं | आये दिन उनके बचकाना बयान एवं हरकतें सोशल साइट्स एवं मीडिया में उनका मजाक उडाये जाने का कारण बनते हैं | लोग उनको राहुल जी की जगह अन्य कई मजाकिया नामों से बुलाने लगे हैं | राहुल जी को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य साबित करने के लिए भाजपा को जरा भी मेहनत नहीं करनी पड़ रही है |

कांग्रेस के नेताओं की मजबूरी हम समझ सकते हैं | वो चाहकर भी पार्टी में राहुल गांधी जी की जगह किसी और नेता को मुखिया बनाने की बात नहीं कर सकते | अब तक जिन कांग्रेसी नेताओं ने नेहरू-गांधी परिवार का विरोध किया उनके साथ पार्टी ने क्या किया सभी को पता है |

हालाँकि भाजपा भी ये नहीं चाहेगी कि कांग्रेस राहुल गांधी जी को हटाकर किसी और नेता को अपना मुखिया बनाए क्योंकि पिछले कुछ चुनावों में राहुल जी ने अपनी गलत बयानबाजी एवं बचकानी हरकतों से लोगों तक यही सन्देश बार बार पहुँचाया है कि कांग्रेस को वोट मत दो | बिहार चुनावों में भी भाजपा की हार एवं महागठबंधन की जीत का श्रेय राहुल गांधी जी को नहीं जाता है | यदि कांग्रेस इसे राहुल जी की जीत के रूप में देखती है तो वो गलत सोच रही है |

असम को छोड़कर आने वाले कुछ विधानसभा चुनाव जिन राज्यों में हैं वहां भाजपा का अभी उतना कोई खास जनाधार नहीं है तो हो सकता है कि वहाँ भाजपा कुछ खास प्रदर्शन न कर पाए | कांग्रेस एवं अन्य कई पार्टियां इसे शायद मोदी जी की लहर खत्म होना ही बताएं लेकिन सच तो यही है कि भाजपा इन राज्यों में पिछले लोकसभा चुनावों में भी कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी तो अब यदि इन विधानसभा चुनावों में भी प्रदर्शन अच्छा न हो तो ये भी कांग्रेस या राहुल जी की जीत नहीं होगी | हालाँकि ये बात असम पर लागू नहीं होती है और वहाँ भाजपा का शक्तिपरीक्षण होगा |

मेरी व्यक्तिगत राय में तो उत्तर प्रदेश विधानसभा का अगला चुनाव ही केंद्र सरकार एवं भाजपा की रणनीति की असली
परीक्षा है | यदि उस में भाजपा अच्छा प्रदर्शन करे एवं सरकार बनाए तो ये भाजपा के लिए बहुत शुभ संकेत होंगे और यदि उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार होती है तो वो भाजपा के लिए निश्चित रूप से बहुत बड़ी चिंता एवं आत्ममंथन का विषय होगा | हालाँकि उत्तर प्रदेश विधानसभा के भी नतीजे कुछ भी हों, इतना तो पक्का है कि वो कांग्रेस के पक्ष में नहीं होंगे तो वहाँ भी राहुल जी एवं कांग्रेस को अपनी पीठ थपथपाने का कोई मौका नहीं मिलने वाला है |

देखते हैं कि कांग्रेस मुक्त भारत का मुख्य कारण प्रधानमंत्री मोदी जी, केंद्र एवं अन्य भाजपा राज्य सरकार एवं भाजपा पदाधिकारियों की रणनीति बनता है या फिर उस के पहले ही कांग्रेस को कांग्रेस ही खत्म कर देगी | मेरी व्यक्तिगत राय में तो इस समय कांग्रेस ही कांग्रेस की सब से बड़ी दुश्मन है और ऐसा ही चलता रहा तो जल्दी ही कांग्रेस खुद ही कांग्रेस मुक्त भारत बना देगी  |