ईमानदारी और राष्ट्रवाद के बीज को भाजपा जैसा वटवृक्ष बनाने वाले नेताओं को मिलेगा उचित सम्मान ?

भाजपा चाहे कितनी भी बदल जाए और कितना भी आगे बढ़ जाये लेकिन चाहकर भी अपने इतिहास से अटल जी, आडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी जी एवं ऐसे कई अन्य ईमानदार और राष्ट्रवादी नामों को हटा नहीं सकती | ये वो नाम हैं जिन्होंने इस पार्टी को कई वर्षों तक राजनैतिक कलंकों से बचाकर रखा तथा हमेशा राष्ट्रवादी और ईमानदार राजनीति की चाहत रखने वालों के लिए आदर्श बने रहे | ऐसे कई नेता राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाने में सफल रहे तो कुछ प्रदेश स्तर तक और कई जिला स्तर की राजनीति से भाजपा की जड़ें मजबूत बनाते रहे और इसे अपनी ईमानदारी और राष्ट्रवाद से सिंचित करते रहे |

पिछले कुछ सालों में भाजपा के संगठन और इसकी सोच में कई बड़े बदलाव हुए | पार्टी का विस्तार करने के लिए कई बड़े छोटे दूसरी पार्टियों से आये अयोग्य लोगों को पार्टी में स्थान दिया गया, जातीय समीकरणों को मिलाने के लिए कई अपात्र लोगों को भी बड़े पदों पर बैठा दिया गया | जब कोई अयोग्य व्यक्ति उच्च पद प्राप्त करता है तो सबसे पहले वो योग्य व्यक्तियों को बाहर करने का प्रयास करता है ताकि उसका स्थान सुरक्षित रहे | अपात्रों की इसी सोच के कारण भाजपा में भी कई स्थानों पर झगड़े हुई और आगे भी होते रहेंगे | कई जगहों पर भाजपा ने योग्य एवं अयोग्य नेताओं के बीच शक्ति का संतुलन बनाये रखा और कई जगह अयोग्य हावी हो गए | दोनों ही स्थितियों में चोट योग्य नेताओं को ही हुई क्योंकि उनकी तकलीफ यही है कि योग्य होने के बाद भी उनको अपनी ही विचारधारा पर चलने वाली पार्टी में अयोग्य और अपात्रों से संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है | उत्तर प्रदेश में भाजपा का लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने का कारण भी यही था कि पिछले कई सालों से पार्टी को अपनी विचारधारा से दूर जाते देखकर ज्यादातर योग्य नेता या तो राजनीति छोड़कर घर बैठे हुए थे या फिर हताश और निराश होकर अधूरे मन से भाजपा के लिए काम कर रहे थे | २०१४ में मोदी जी के नेतृत्व में इन सभी नेताओं को ईमानदारी एवं राष्ट्रवाद से भाजपा को आगे बढ़ाने का एक मौका दिखा और इन सब ने वापस सक्रिय होकर पार्टी को सत्ता के उच्च स्थान तक पहुँचाया | लेकिन पार्टी ने २०१४ के परिणामों से कोई सीख नहीं ली और पार्टी में अपात्रों और अयोग्यों को उच्च पद और योग्य नेताओं को “निस्वार्थ राजनीति” की लॉलीपॉप देने का सिलसिला नहीं थमा | यह बात प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पद की नहीं है क्योंकि फिलहाल भाजपा में इन पदों पर कोई अयोग्य व्यक्ति नहीं पहुँच सकता, यहाँ बात अन्य सभी पदों की है जहाँ धीरे धीरे योग्यता के ऊपर चुनावी और जातीय समीकरण हावी होते जा रहे हैं |

भाजपा शायद भूल रही है कि इसे पहले भी सत्ता अपनी असली विचारधारा के नायक अटल जी और आडवाणी जी के नेतृत्व में मिली थी और २०१४ में भी इसी विचारधारा के नायक मोदी जी के नेतृत्व में मिली | उत्तर प्रदेश में भी ऐसे परिणाम मोदी जी के नेतृत्व और नाम की ही वजह से मिले | ईमानदार एवं राष्ट्रवादी विचारधारा रुपी बीज को भाजपा जैसा वटवृक्ष बनाने वाले नेताओं को यदि उचित और उच्च स्थान सम्मान पार्टी ने नहीं दिया और और चुनावी जातीय समीकरण जमाने के चक्कर में अयोग्यों और अपात्रों को उच्च पद दिए जाते रहे तो कुछ सालों के बाद भाजपा के रूप में एक दूसरी कांग्रेस ही दिखाई देगी |

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव आने वाला है, देखते हैं इसमें भाजपा के उम्मीदवारों के चयन योग्यता के आधार पर होंगे या फिर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव भी भविष्य के किसी चुनावी जातीय समीकरण को दिमाग में रखकर किया जायेगा ? अटल जी को उनकी देशसेवा के लिए भारत रत्न देकर भाजपा ने पूरे देश की ओर से उनको धन्यवाद दे दिया और अब आडवाणी जी को भी उनकी देश सेवा के लिए सम्मान और धन्यवाद देने का उचित समय है | साथ ही वो अन्य सभी छोटे बड़े नेता जो आजीवन ईमानदारी और राष्ट्रवाद की विचारधारा पर चलते रहे और आज भी चल रहे हैं, उनको भी उचित स्थान और सम्मान दिया जाना चाहिए क्योंकि यही वो नेता हैं जिनकी मेहनत की वजह से भाजपा सत्ता के शिखर तक पहुंची है | अपात्रों और अयोग्यों का क्या है, आज भाजपा शक्तिशाली है तो भाजपा में हैं, कल कोई और पार्टी होगी तो उसमें चले जायेंगे लेकिन योग्य और निष्ठावान भाजपाई हमेशा भाजपा में ही रहेंगे और इसे और ज्यादा मजबूत बनाने का प्रयास करते रहेंगे |

(फोटो साभार – जी न्यूज)