भाजपा के वरिष्ठ और पूर्व नेताओं का अपमान करना भाजपा की नयी परंपरा ?

वरिष्ठ नेताओं और बुजुर्गों को सम्मान देना भाजपा की बहुत पुरानी परंपरा है | आपने कई बड़े भाजपाई नेताओं को अपने से बड़ी उम्र के नागरिकों को चरण स्पर्श करते कई बार देखा होगा | वहीँ कांग्रेस के इतिहास में कई बार बुजुर्गों के अपमान का काला दाग लगा हुआ है | कई बार कई बुजुर्ग लोगों को आपने अपने से कई साल उम्र में छोटे कोंग्रेसी नेताओं के चरण स्पर्श करते देखा होगा | कुछ बातें थीं जो हमेशा भाजपा और कांग्रेस पार्टी की पहचान बनीं रहीं | उदाहरण के लिए भाजपा में अनुशासन और बुजुर्गों का सम्मान और कांग्रेस में सिर्फ गाँधी परिवार का सम्मान और नेताओं की राजशाही | कांग्रेस तो सुधरने से रही सो आज भी अपनी इन बातों पर चल रही है | लेकिन पिछले कुछ समय में कुछ भाजपा नेताओं ने अनुशासनहीनता भी की और बुजुर्गों का अपमान भी किया |

नया मामला है जब कि भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा जी ने मौजूदा वित्तमंत्री अरुण जेटली की नीतियों की कड़ी आलोचना की और अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय रखी | हालाँकि उनके द्वारा उठाये गए मुद्दों में कुछ गलत आंकड़े थे और इस बारे में हमारी वेबसाइट पर भी एक लेख लिखा गया था | यहाँ भाजपा नेताओं को भी गलत आंकड़ों का जवाब सही आंकड़ों से देना चाहिए था, कुछ नेताओं ने ऐसा किया भी | परन्तु दो बड़े भाजपा नेताओं ने आंकड़ों पर बहस करने की जगह अपशब्द और अपमानजनक जवाब दिए, इनमें से एक तो स्वयं अरुण जेटली हैं और दूसरे भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह कामत | वीरेंद्र सिंह कामत ने यशवंत सिन्हा को अनर्थशास्त्री कह डाला और यह कहते हुए वो शायद यह भी भूल गए कि यशवंत सिन्हा उन्हीं की पार्टी की पिछली सरकार में वित्त मंत्री थे | अरुण जेटली स्वयं भी भाजपा के वरिष्ठ और बहुत पुराने बड़े नेता हैं, उन्होंने भी यशवंत सिन्हा जी को job applicant in 80s (८० की उम्र में नौकरी तलाशने वाला) कह डाला और साथ ही उनके समय के वित्त मंत्रालय की खामियां गिना डालीं |

वैसे भाजपा के अनुशासन के अनुसार पार्टी के नेताओं को अपनी शिकायत पार्टी के मंच पर उठानी चाहिए थी | लेकिन यशवंत सिन्हा जी ने इस तरह सीधे मीडिया में जो कहा शायद उसके भी कारण हैं | पिछले लोकसभा चुनाव के बाद बुजुर्ग नेताओं को एक तरह का रिटायरमेंट देकर भाजपा ने मार्गदर्शक मंडल बना दिया था और कहा था कि यह मार्गदर्शक मंडल भाजपा का मार्गदर्शन करेगा | परन्तु मुझे तो याद नहीं कि कभी भी भाजपा ने आधिकारिक तौर पर मार्गदर्शक मंडल की कोई मीटिंग बुलाई हो या उनको किसी भी निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया हो | अब यदि मार्गदर्शक मंडल किसी मुद्दे पर कोई सलाह या प्रतिक्रिया देना चाहे तो कैसे दें ? हो सकता है कि यह भी एक मजबूरी रही हो कि यशवंत सिन्हा जी को इस तरह कहकर मीडिया के सामने वित्तमंत्रालय के खिलाफ अपनी राय रखनी पड़ी वह भी तब जबकि उनके सुपुत्र इसी सरकार में मंत्री हैं | इतना ज्ञान तो उनको रहा होगा कि उनका यह कदम पार्टी में उनके अपने बेटे के भविष्य के लिए ठीक नहीं है | शायद वो इस तरह मीडिया के सामने न आते यदि पार्टी ने मार्गदर्शक मंडल को अपनी बात रखने के मौके दिए होते |

परन्तु अपने बुजुर्गों का सम्मान करने वाली पार्टी के नेताओं द्वारा अपने सीनियर नेता को इस तरह के अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना शोभा नहीं देता | तर्क का जवाब तर्क से और आंकड़ों का जवाब आंकड़ों से दिया जाना चाहिए था | यह सब उस पार्टी में हुआ जहाँ कभी वरिष्ठ नेताओं का अपमान नहीं हुआ करता था | अनुशासन और विचारधारा पर चलने वाली एक बड़ी पार्टी के कुछ नेताओं का सत्ता के मद में वैचारिक पतन होते देखकर दुःख हुआ | इन लोगों को अपनी पार्टी का इतिहास पढ़ना चाहिए और उस से कुछ सीखना चाहिए | कहीं ऐसा न हो कि कुछ गिने चुने नेताओं की गलतियों से मोदी सरकार इतनी मेहनत के बाद भी अपने समर्थकों की आलोचना और क्रोध का शिकार हो जाये |