बलात्कार – नाम आसिफा तो बेटी और गीता तो भाभी, तथाकथित सेक्युलरों की नीचता

पिछले कुछ दिनों में वैसे तो बलात्कार की कई घटनाएं हुईं लेकिन दो प्रमुख घटनाएं मीडिया, राजनीति एवं सोशल साइट्स पर छायीं रहीं | वैसे मुझे बलात्कार की शिकार हर महिला/बच्ची से हमदर्दी है और हर एक बलात्कारी से नफरत चाहे उनका धर्म कुछ भी हो, परन्तु यहाँ मैं इन दो केस में धर्म का जिक्र करने पर मजबूर हूँ क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे हैं | सब से पहले आसिफा केस को देखते हैं | इस बलात्कार के मामले में पूरे देश ने अपने अपने तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, कुछ ने इस में गन्दी राजनीति चमकाने के लिए हिन्दू धर्म को ही बलात्कारी बना दिया हालाँकि ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता परन्तु भगवा आतंकवाद होता है | इन विरोध प्रदर्शन में हिन्दुओं ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था | चूंकि लड़की मुसलमान थी और आरोपी हिन्दू तो मीडिया और राजनीति में तो इस मामले पर आंसू बहाये जाने ही थे | अब बात करते हैं गीता की | कितने न्यूज़ चैनल्स पर आप को उसी तरह की रिपोर्टिंग दिखाई दी जो कि आसिफा मामले में थी ? कितने नेताओं ने गीता के लिए आंसू बहाये ? कितने लोगों ने इस बलात्कार के लिए इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया ? हमदर्दी तो बहुत दूर की बात है, आसिफा के लिए छाती पीटने वाले लोग गीता को भाभी बताकर इस बलात्कार का मजाक बना रहे हैं, गीता को भाभी कह रहे हैं और बलात्कारी का समर्थन कर रहे हैं | ऐसी कई पोस्ट्स सोशल साइट्स पर हैं और इनको शेयर करने वालों में कुछ तो तथाकथित सेक्युलर राजनैतिक दलों के सदस्य व पदाधिकारी भी हैं | सेक्युलर जमात के नेताओं और न्यूज़ एजेंसियों से तो वैसे भी इस मामले में कोई उम्मीद नहीं थी क्योंकि बलात्कार की शिकार बच्ची हिन्दू है और आरोपी मुसलमान | आखिर यह अंतर क्यों है ?

क्या अब अपराध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का मापदंड बस इतना ही रहेगा कि अपराध का शिकार व्यक्ति किस धर्म या जाति का है और अपराध का आरोपी किस धर्म और जाति का ? क्या आज हमारे देश में अब इस नीच सोच के लोग हैं जो कि बलात्कार की शिकार दो बच्चियों में से एक में बेटी और दूसरी में भाभी देखेंगे ? आखिर क्यों हम एक आवाज में यह मांग नहीं करते कि बलात्कारी किसी भी धर्म का हो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले और बलात्कार की शिकार महिला / बच्ची चाहे किसी भी धर्म की हो उसे न्याय मिले ?

लोकतंत्र में हमें वैसा ही राजा मिलेगा जैसी सोच के लोग बहुमत में हैं | क्या होगा इस देश का जब कि ऐसी ही नीच सोच के लोग इस देश की सरकार और न्यायालयों में भी बैठ जायेंगे ? फिर बस ऐसे ही कानून बनेंगे कि फलां धर्म के पुरुषों लिए बलात्कार करने पर कोई सजा नहीं होगी और फलां धर्म के लोगों को बलात्कार करने पर फांसी पर लटका देंगे या फिर फलां धर्म की लड़की के बलात्कार की FIR तक नहीं लिखी जाएगी और फलां धर्म की लड़की अगर FIR कर दे तो बिना जांच की ही आरोपी को फांसी पर लटका दिया जायेगा | पिछली यू. पी. ए. सरकार का दंगों के लिए लाया गया कानून तो कुछ इसी तरह का था कि चाहे किसी ने भी कुछ भी किया हो सजा सिर्फ हिन्दुओं को ही मिलेगी, वो तो गनीमत थी कि यह कानून पास नहीं हो सका | क्या अब आप इसी तरह का कोई कानून बलात्कार के लिए भी चाहते हैं ?

नीच सोच के जो व्यक्ति गीता का मजाक उड़ा रहे हैं उनसे न तो मुझे कोई उम्मीद है न ही उनसे मैं ज्यादा कुछ कहूंगा | पर वो सभी लोग जो कि हर एक बलात्कार के विरोधी हैं और हर एक बलात्कारी से नफरत करते हैं, उनको मैं यही कहूंगा कि चुनाव में वोट डालते समय यह जरूर ध्यान रखें कि गलती से वो लोग सत्ता में न आ जाएं जो कि अपराध का विरोध भी अपराधी और अपराध के शिकार का धर्म और जाति देखकर करते हैं | ऐसे लोग पूरे समाज, देश, मानवता, कानून व्यवस्था आदि के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं |

नीचे दिए कुछ उदहारण देखिये और सोचिये कि यदि ऐसी सोच के लोग इस देश की सत्ता पर कब्ज़ा कर के बैठ गए तो इस देश का क्या होगा | इस देश में सरकार किस की बनेगी यह फैसला तो सिर्फ जनता ही कर सकती है | जनता से मेरा निवेदन बस यही है कि सोच समझकर वोट दें, गन्दी सोच वालों को हरायें और अच्छी सोच वालों को जिताएं |

एक बार फिर जनता से हाथ जोड़कर मेरा निवेदन बस यही है कि सोच समझकर वोट दें, गन्दी सोच वालों को हरायें और अच्छी सोच वालों को जिताएं |